दैनिक पंचांग
दिल्ली, दिल्ली, भारत · सोमवार, 10 ऑग 2026
आषाढ, कृष्ण · तिथी 12
सूर्योदय
05:47सूर्यास्त
19:05चंद्रोदय
02:39चंद्रास्त
17:22चंद्रोदय आणि चंद्रास्त या ठिकाणच्या कॅलेंडर दिवसासाठी (मध्यरात्र ते मध्यरात्र) आहेत. चंद्र दररोज सुमारे 50 मिनिटे उशिरा उगवतो, म्हणून काही तारखांना तो त्या दिवसात उगवत किंवा मावळत नाही. तेव्हा डॅशचा अर्थ घटना शेजारच्या दिवशी घडते.
पंचांग अंगे
| अंग | मूल्य | समाप्ती | ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| तिथी | द्वादशी | 08:01 | भद्रा (शुभ) सेवा, आरोग्यविषयक बाबी आणि स्थिर कामासाठी शुभ. |
| नक्षत्र | आर्द्रा | 12:25 | रुद्राचे वादळ. शास्त्र याला आवश्यक विध्वंस — नूतनीकरणापूर्वीची स्वच्छता — आणि किंमत मोजून मिळालेल्या अंतर्दृष्टीशी जोडते. |
| योग | वज्र | 22:23 | शुभ मुहूर्त साहित्यात शुभ योगांमध्ये गणला जातो. |
| करण | तैतिल | 08:01 | सात चर करणांपैकी एक, जी महिनाभर पुन्हा पुन्हा येतात. |
| वार | सोमवार | — | चंद्राचा दिवस. पाणी, प्रवास आणि घरगुती कामांसाठी शुभ. |
मुहूर्त वर्गीकरण शास्त्रीय मुहूर्त साहित्यातून (मुहूर्त चिंतामणी आणि पंचांग परंपरा). हे निवडीचे नियम आहेत, भाकीत नाही.
दिवसाचे काळ
- सूर्योदय 05:47
- सूर्यास्त 19:05
- परंपरेत त्याज्य
- परंपरेत शुभ
सूर्य आणि मुहूर्त
| कालखंड | पासून | पर्यंत | ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 05:47 | — | |
| सूर्यास्त | 19:05 | — | |
| राहुकाळ | 07:27 | 09:06 | सुमारे 90 मिनिटांचा अशुभ काळ, ज्याचे स्थान वारावरून ठरते. ग्रंथ त्यात नवे काहीही सुरू करण्यास मनाई करतात. |
| गुलिक | 14:06 | 15:45 | शनीचा उपकाळ; राहू काळाप्रमाणेच कारणांनी वर्ज्य, आणि परिणामात अधिक टिकाऊ मानला जातो. |
| यमगंड | 10:46 | 12:26 | तिसरा अशुभ काळ, तोही वारावरून निश्चित. |
| अभिजित | 11:59 | 12:52 | दिवसाचे आठवे मुहूर्त, जे स्थानिक मध्यान्हावर येते. परंपरेने दिवसातील सर्वाधिक शुभ काळ आणि सुरुवातीसाठी प्रमाण पर्याय. |
सूर्योदय वरच्या कडेसाठी वातावरणीय वक्रीभवनासह मोजला आहे — दृक परंपरा. बिंब-केंद्र घेतल्यास या पानावरील प्रत्येक वेळ दोन ते चार मिनिटांनी बदलली असती, म्हणून ही निवड सांगितली आहे, गृहीत धरलेली नाही.
चौघडिया
रात्रीचा क्रम चक्राच्या वेगळ्या बिंदूपासून सुरू होतो, म्हणून दोन्ही स्वतंत्रपणे दिले आहेत, एकातून दुसरे काढलेले नाही.
दिवस
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृत | 05:47 | 07:27 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| काल | 07:27 | 09:06 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| शुभ | 09:06 | 10:46 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| रोग | 10:46 | 12:26 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| उद्वेग | 12:26 | 14:06 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| चल | 14:06 | 15:45 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| लाभ | 15:45 | 17:25 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 17:25 | 19:05 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
रात्र
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| चल | 19:05 | 20:25 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| रोग | 20:25 | 21:45 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| काल | 21:45 | 23:06 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| लाभ | 23:06 | 00:26 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 00:26 | 01:46 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| शुभ | 01:46 | 03:07 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| अमृत | 03:07 | 04:27 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| चल | 04:27 | 05:47 | सम प्रवास आणि हालचाल |
गौरी पंचांगम्
तमिळ पद्धत दिवसाच्या त्याच आठ भागांना वेगळी नावे देते. हे भाषांतर नाही, वेगळे कोष्टक आहे — दिवसाचा कोणता भाग शुभ यावर दोघांचे मतभेद आहेत.
| गौरी | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| उथि | 05:47 | 07:27 | सम सामान्य काम |
| सोरम् | 07:27 | 09:06 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| रोगम् | 09:06 | 10:46 | वर्ज्य फक्त औषध |
| विषम् | 10:46 | 12:26 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| लाभम् | 12:26 | 14:06 | शुभ लाभ, नवे काम |
| धनम् | 14:06 | 15:45 | शुभ धन, खरेदी, व्यापार |
| सुगम् | 15:45 | 17:25 | शुभ प्रवास, सुलभता, आदरातिथ्य |
| अमृतम् | 17:25 | 19:05 | सर्वोत्तम कोणतेही मंगल कार्य |
होरा
सूर्योदयापासून चोवीस होरा, कॅल्डियन क्रमाने. त्या असमान असतात — बारा दिवस-होरा दिवसाला आणि बारा रात्र-होरा रात्रीला वाटतात — म्हणून उन्हाळ्यात दिवस-होरा तासाहून मोठी आणि रात्र-होरा लहान असते. कोणत्याही दिवसाची पहिली होरा त्याच दिवसाच्या स्वामीची असते, आणि तिथूनच वारांची नावे आली.
| # | होरा स्वामी | पासून | पर्यंत | कशासाठी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | चंद्र | 05:47 | 06:53 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 2 | शनी | 06:53 | 08:00 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 3 | गुरू | 08:00 | 09:06 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 4 | मंगळ | 09:06 | 10:13 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 5 | सूर्य | 10:13 | 11:19 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 6 | शुक्र | 11:19 | 12:26 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 7 | बुध | 12:26 | 13:32 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 8 | चंद्र | 13:32 | 14:39 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 9 | शनी | 14:39 | 15:45 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 10 | गुरू | 15:45 | 16:52 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 11 | मंगळ | 16:52 | 17:58 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 12 | सूर्य | 17:58 | 19:05 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 13 रात्र | शुक्र | 19:05 | 19:58 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 14 रात्र | बुध | 19:58 | 20:52 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 15 रात्र | चंद्र | 20:52 | 21:45 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 16 रात्र | शनी | 21:45 | 22:39 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 17 रात्र | गुरू | 22:39 | 23:33 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 18 रात्र | मंगळ | 23:33 | 00:26 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 19 रात्र | सूर्य | 00:26 | 01:20 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 20 रात्र | शुक्र | 01:20 | 02:13 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 21 रात्र | बुध | 02:13 | 03:07 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 22 रात्र | चंद्र | 03:07 | 04:00 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 23 रात्र | शनी | 04:00 | 04:54 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 24 रात्र | गुरू | 04:54 | 05:47 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
सण आणि व्रते
| चांद्रमास (अमांत) | आषाढ |
|---|---|
| चांद्रमास (पौर्णिमांत) | श्रावण |
| पक्ष | कृष्ण |
| तिथी | 12 |
दोन्ही पद्धती या महिन्याला वेगळे नाव देतात — एकच दिवस, दोन बरोबर नावे.
प्रदोष — त्रयोदशीची संध्याकाळ, शंकरासाठी (या महिन्यात ही तिथी कोणत्याही सूर्योदयी टिकत नाही, म्हणून ज्या दिवशी आली त्याच दिवशी नोंदवली आहे)