दैनिक पंचांग
पुणे, महाराष्ट्र, भारत · शनिवार, 18 जुलै 2026
सूर्योदय
06:07सूर्यास्त
19:14चंद्रोदय
09:53चंद्रास्त
22:21चंद्रोदय आणि चंद्रास्त या ठिकाणच्या कॅलेंडर दिवसासाठी (मध्यरात्र ते मध्यरात्र) आहेत. चंद्र दररोज सुमारे 50 मिनिटे उशिरा उगवतो, म्हणून काही तारखांना तो त्या दिवसात उगवत किंवा मावळत नाही. तेव्हा डॅशचा अर्थ घटना शेजारच्या दिवशी घडते.
पंचांग अंगे
| अंग | मूल्य | समाप्ती | ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| तिथी | पंचमी नंतर षष्ठी |
03:43 19 जुलै 2026 |
पूर्णा (पूर्ण) पूर्णता आणि भरलेपणाची सूचक; विवाह आणि प्रवासासाठी शुभ. |
| नक्षत्र | पूर्वा फाल्गुनी नंतर उत्तरा फाल्गुनी |
18:00 | विश्रांती, आनंद आणि सहवास. सृजनाआधीचा आराम, आणि जे मिळवले त्याचा उपभोग. |
| योग | वरीयान् नंतर परिघ |
20:45 | शुभ मुहूर्त साहित्यात शुभ योगांमध्ये गणला जातो. |
| करण | बव नंतर बालव · 03:43 (19 जुलै 2026) पर्यंत नंतर कौलव |
16:07 | सात चर करणांपैकी एक, जी महिनाभर पुन्हा पुन्हा येतात. |
| वार | शनिवार | — | शनीचा दिवस. श्रम, लोखंड आणि दीर्घ उपक्रमांशी संबंधित. |
मुहूर्त वर्गीकरण शास्त्रीय मुहूर्त साहित्यातून (मुहूर्त चिंतामणी आणि पंचांग परंपरा). हे निवडीचे नियम आहेत, भाकीत नाही.
दिवसाचे काळ
- सूर्योदय 06:07
- सूर्यास्त 19:14
- परंपरेत त्याज्य
- परंपरेत शुभ
सूर्य आणि मुहूर्त
| कालखंड | पासून | पर्यंत | ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 06:07 | — | |
| सूर्यास्त | 19:14 | — | |
| राहुकाळ | 09:24 | 11:02 | सुमारे 90 मिनिटांचा अशुभ काळ, ज्याचे स्थान वारावरून ठरते. ग्रंथ त्यात नवे काहीही सुरू करण्यास मनाई करतात. |
| गुलिक | 06:07 | 07:45 | शनीचा उपकाळ; राहू काळाप्रमाणेच कारणांनी वर्ज्य, आणि परिणामात अधिक टिकाऊ मानला जातो. |
| यमगंड | 14:19 | 15:57 | तिसरा अशुभ काळ, तोही वारावरून निश्चित. |
| अभिजित | 12:14 | 13:06 | दिवसाचे आठवे मुहूर्त, जे स्थानिक मध्यान्हावर येते. परंपरेने दिवसातील सर्वाधिक शुभ काळ आणि सुरुवातीसाठी प्रमाण पर्याय. |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:40 | 05:23 | पहाटेपूर्वी: परंपरेने उठणे, प्रार्थना, ध्यान आणि अभ्यासाची वेळ. |
| प्रातः संध्या | 05:02 | 06:07 | पहाटेची संध्या, सूर्योदयाला संपणारी: सकाळच्या पूजेची वेळ. |
| विजय मुहूर्त | 14:51 | 15:44 | प्रवासाला निघण्यासाठी आणि यश हवे असलेल्या कामांसाठी शुभ. |
| गोधूलि मुहूर्त | 19:14 | 19:35 | सूर्यास्ताची गोरज वेळ: अनेक प्रदेशांत विवाहासाठी शुभ. |
| सायाह्न संध्या | 19:14 | 20:19 | सायंकाळची संध्या, सूर्यास्तापासून: सायंकाळच्या पूजेची वेळ. |
| निशीथ मुहूर्त | 00:19 | 01:02 19 जुलै 2026 |
मध्यरात्रीचा मुहूर्त, अभिजितचा प्रतिरूप: शिव आणि कालीच्या पूजेसाठी, जसे शिवरात्रीला. |
| दुर्मुहूर्त | 06:07 | 06:59 | शुभ कार्यांच्या सुरुवातीसाठी वर्ज्य. |
| दुर्मुहूर्त | 06:59 | 07:52 | शुभ कार्यांच्या सुरुवातीसाठी वर्ज्य. |
| अमृत काळ | 11:45 | 13:19 | सुमारे दीड तासाचा काळ, जो सूर्यावरून नव्हे तर चंद्राच्या नक्षत्रावरून ठरतो: शुभ कार्याची सुरुवात करण्यासाठी उत्तम मानला जातो. |
| वर्ज्यम् | 01:16 19 जुलै 2026 |
02:52 19 जुलै 2026 |
चंद्राच्या नक्षत्रावरून ठरणारा सुमारे दीड तासाचा काळ, ज्याला त्याज्यम् असेही म्हणतात: यात नवी कामे सुरू करत नाहीत. दक्षिण भारतात राहु काळाबरोबर विशेष पाळला जातो. |
दिवस एका दृष्टिक्षेपात
- दिनमान
- 13 ता 6 मि
- रात्रिमान
- 10 ता 53 मि
- मध्यान्ह
- 12:40
- दिशा शूल — प्रवासासाठी वर्ज्य दिशा
- पूर्व
सूर्याची वरची कडा क्षितिजावर येते तेव्हा सूर्योदय मानला आहे, वातावरणीय अपवर्तनासह — दृक् पंचांगाची पद्धत. सूर्याच्या मध्याला धरणाऱ्या पंचांगांत दोन ते चार मिनिटांचा फरक असू शकतो.
दिवसाचा अधिक तपशील
- चंद्र राशी
- सिंह · 23:59 पर्यंत
नंतर कन्या - सूर्य राशी
- कर्क
- नक्षत्र चरण
- पूर्वा फाल्गुनी चरण 2 · 06:12 पर्यंत
पूर्वा फाल्गुनी चरण 3 · 12:04 पर्यंत
पूर्वा फाल्गुनी चरण 4 · 18:00 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 1 · 23:59 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 2 · 06:00 (19 जुलै 2026) पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 3 - सूर्य नक्षत्र
- पुनर्वसू चरण 4
- आनंदादी योग
- लुम्बक · 18:00 पर्यंत
नंतर उत्पात - शके
- 1948 पराभव
- विक्रम संवत
- 2083 सिद्धार्थी
- गुजराती संवत
- 2082 पिंगल
- ऋतू (चांद्र मासानुसार)
- ग्रीष्म
- ऋतू (सूर्याच्या ऋतूनुसार)
- वर्षा
- अयन (निरयन)
- दक्षिणायन
- अयन (अयनांतानुसार)
- दक्षिणायन
- चंद्र वास (चंद्राची दिशा)
- पूर्व · 23:59 पर्यंत
नंतर दक्षिण - राहु वास (राहूची दिशा)
- पूर्व
- बृहस्पती संवत्सर
- रौद्र · 16:15 (17 एप्रि 2027) पर्यंत
शक वर्ष चैत्र शुद्ध प्रतिपदेला आणि गुजराती वर्ष दिवाळीच्या दुसऱ्या दिवशी, कार्तिक शुद्ध प्रतिपदेला बदलते. दोन ऋतू वेगळे आहेत कारण एक चांद्र मासानुसार चालतो आणि दुसरा सूर्याच्या प्रत्यक्ष ऋतूनुसार.
| कालखंड | पासून | पर्यंत | ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| रवि योग | 18:00 | 06:07 19 जुलै 2026 |
चंद्राचे नक्षत्र सूर्याच्या नक्षत्रापासून 4थे, 6वे, 9वे, 10वे, 13वे किंवा 20वे असते तेव्हा: दिवसाचे अनेक दोष दूर करणारा मानला जातो, म्हणून कार्यारंभासाठी शोधला जातो. |
| भद्रा | आज नाही | विष्टी करण. यात शुभ कार्ये टाळली जातात, विशेषतः भद्रा पृथ्वीवर वास करते असे मानले जाते तेव्हा; स्वर्गात किंवा पाताळात असल्यास येथे निरुपद्रवी मानली जाते. | |
| गंड मूळ | आज नाही | चंद्र अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूळ किंवा रेवतीत, जल आणि अग्नी राशींच्या संधीवरील नक्षत्रे. यात जन्म झाल्यास परंपरेने शांती केली जाते. | |
| पंचक | आज नाही | चंद्र कुंभ किंवा मीनमध्ये, धनिष्ठेच्या उत्तरार्धापासून रेवतीच्या अखेरपर्यंत. परंपरेने दक्षिणेकडील प्रवास, छत घालणे आणि लाकूड गोळा करणे टाळले जाते. | |
| बाण: मृत्यू | 06:07 | 01:56 19 जुलै 2026 |
राशीतील सूर्याच्या अंशावरून ठरतो, म्हणून प्रत्येक बाण सुमारे एक दिवस राहतो. मुहूर्त ग्रंथ औषधासाठी रोग, बांधकामासाठी अग्नी, शासनाशी व्यवहारासाठी राज, प्रवासासाठी चोर आणि विवाहासाठी मृत्यू बाण टाळतात. |
| बाण: अग्नी | 01:56 19 जुलै 2026 | 06:07 19 जुलै 2026 |
राशीतील सूर्याच्या अंशावरून ठरतो, म्हणून प्रत्येक बाण सुमारे एक दिवस राहतो. मुहूर्त ग्रंथ औषधासाठी रोग, बांधकामासाठी अग्नी, शासनाशी व्यवहारासाठी राज, प्रवासासाठी चोर आणि विवाहासाठी मृत्यू बाण टाळतात. |
चंद्रबळ आणि ताराबळ
तुमच्या स्वतःच्या जन्म राशी किंवा नक्षत्रासाठी: यादीत असल्यास दिवस तुम्हाला अनुकूल आहे. चंद्राची राशी तुमच्या राशीपासून मोजली जाते (1, 3, 6, 7, 10, 11 शुभ) आणि चंद्राचे नक्षत्र तुमच्या नक्षत्रापासून नऊच्या गटात (संपत्, क्षेम, साधक, मित्र, परम मित्र शुभ).
- चंद्रबळ · 23:59 पर्यंत
- मिथुन, सिंह, तूळ, वृश्चिक, कुंभ, मीन
अष्टम चंद्र: मकर - चंद्रबळ · पुढच्या सूर्योदयापर्यंत
- मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनू, मीन
अष्टम चंद्र: कुंभ - ताराबळ · 18:00 पर्यंत
- अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूळ, उत्तराषाढा, श्रवण, शततारका, उत्तरा भाद्रपदा
- ताराबळ · पुढच्या सूर्योदयापर्यंत
- भरणी, रोहिणी, मृगशीर्ष, पुनर्वसू, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपदा, रेवती
उदय लग्न
| लग्न | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| कर्क | 06:05 | 08:18 |
| सिंह | 08:18 | 10:26 |
| कन्या | 10:26 | 12:32 |
| तूळ | 12:32 | 14:43 |
| वृश्चिक | 14:43 | 16:57 |
| धनू | 16:57 | 19:03 |
| मकर | 19:03 | 20:53 |
| कुंभ | 20:53 | 22:30 |
| मीन | 22:30 | 00:05 19 जुलै 2026 |
| मेष | 00:05 19 जुलै 2026 | 01:49 19 जुलै 2026 |
| वृषभ | 01:49 19 जुलै 2026 | 03:49 19 जुलै 2026 |
| मिथुन | 03:49 19 जुलै 2026 | 06:01 19 जुलै 2026 |
पंचक रहित मुहूर्त
| कालखंड | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| पंचक रहित (शुभ) | 06:07 | 08:18 |
| मृत्यू | 08:18 | 10:26 |
| अग्नी | 10:26 | 12:32 |
| पंचक रहित (शुभ) | 12:32 | 14:43 |
| राज | 14:43 | 16:57 |
| पंचक रहित (शुभ) | 16:57 | 18:00 |
| चोर | 18:00 | 19:03 |
| पंचक रहित (शुभ) | 19:03 | 20:53 |
| रोग | 20:53 | 22:30 |
| पंचक रहित (शुभ) | 22:30 | 01:49 19 जुलै 2026 |
| रोग | 01:49 19 जुलै 2026 | 03:43 19 जुलै 2026 |
| पंचक रहित (शुभ) | 03:43 19 जुलै 2026 | 03:49 19 जुलै 2026 |
| मृत्यू | 03:49 19 जुलै 2026 | 06:01 19 जुलै 2026 |
| अग्नी | 06:01 19 जुलै 2026 | 06:07 19 जुलै 2026 |
सूर्योदयाच्या वेळी उदित लग्नापासून दिवसभर पूर्वेला उदित होणारी निरयन राशी. पंचक रहित मुहूर्त दिवसाला जिथे लग्न, तिथी किंवा नक्षत्र बदलते तिथे विभागतो आणि वारासह चारही बेरीज करतो: बाकी 1, 2, 4, 6 आणि 8 पाच पंचक दर्शवतात, इतर पंचक रहित.
चौघडिया
रात्रीचा क्रम चक्राच्या वेगळ्या बिंदूपासून सुरू होतो, म्हणून दोन्ही स्वतंत्रपणे दिले आहेत, एकातून दुसरे काढलेले नाही.
दिवस
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| काल | 06:07 | 07:45 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| शुभ | 07:45 | 09:24 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| रोग | 09:24 | 11:02 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| उद्वेग | 11:02 | 12:40 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| चल | 12:40 | 14:19 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| लाभ | 14:19 | 15:57 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 15:57 | 17:35 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| काल | 17:35 | 19:14 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
रात्र
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| लाभ | 19:14 | 20:35 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 20:35 | 21:57 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| शुभ | 21:57 | 23:19 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| अमृत | 23:19 | 00:40 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| चल | 00:40 | 02:02 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| रोग | 02:02 | 03:24 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| काल | 03:24 | 04:46 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| लाभ | 04:46 | 06:07 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
गौरी पंचांगम्
तमिळ पद्धत दिवसाच्या त्याच आठ भागांना वेगळी नावे देते. हे भाषांतर नाही, वेगळे कोष्टक आहे — दिवसाचा कोणता भाग शुभ यावर दोघांचे मतभेद आहेत.
| गौरी | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| सुगम् | 06:07 | 07:45 | शुभ प्रवास, सुलभता, आदरातिथ्य |
| अमृतम् | 07:45 | 09:24 | सर्वोत्तम कोणतेही मंगल कार्य |
| उथि | 09:24 | 11:02 | सम सामान्य काम |
| सोरम् | 11:02 | 12:40 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| रोगम् | 12:40 | 14:19 | वर्ज्य फक्त औषध |
| विषम् | 14:19 | 15:57 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| लाभम् | 15:57 | 17:35 | शुभ लाभ, नवे काम |
| धनम् | 17:35 | 19:14 | शुभ धन, खरेदी, व्यापार |
होरा
सूर्योदयापासून चोवीस होरा, कॅल्डियन क्रमाने. त्या असमान असतात — बारा दिवस-होरा दिवसाला आणि बारा रात्र-होरा रात्रीला वाटतात — म्हणून उन्हाळ्यात दिवस-होरा तासाहून मोठी आणि रात्र-होरा लहान असते. कोणत्याही दिवसाची पहिली होरा त्याच दिवसाच्या स्वामीची असते, आणि तिथूनच वारांची नावे आली.
| # | होरा स्वामी | पासून | पर्यंत | कशासाठी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | शनी | 06:07 | 07:12 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 2 | गुरू | 07:12 | 08:18 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 3 | मंगळ | 08:18 | 09:24 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 4 | सूर्य | 09:24 | 10:29 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 5 | शुक्र | 10:29 | 11:35 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 6 | बुध | 11:35 | 12:40 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 7 | चंद्र | 12:40 | 13:46 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 8 | शनी | 13:46 | 14:51 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 9 | गुरू | 14:51 | 15:57 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 10 | मंगळ | 15:57 | 17:03 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 11 | सूर्य | 17:03 | 18:08 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 12 | शुक्र | 18:08 | 19:14 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 13 रात्र | बुध | 19:14 | 20:08 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 14 रात्र | चंद्र | 20:08 | 21:03 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 15 रात्र | शनी | 21:03 | 21:57 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 16 रात्र | गुरू | 21:57 | 22:52 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 17 रात्र | मंगळ | 22:52 | 23:46 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 18 रात्र | सूर्य | 23:46 | 00:40 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 19 रात्र | शुक्र | 00:40 | 01:35 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 20 रात्र | बुध | 01:35 | 02:29 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 21 रात्र | चंद्र | 02:29 | 03:24 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 22 रात्र | शनी | 03:24 | 04:18 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 23 रात्र | गुरू | 04:18 | 05:13 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 24 रात्र | मंगळ | 05:13 | 06:07 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
सण आणि व्रते
या तारखेला काही नोंदलेले नाही.