दैनिक पंचांग
कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत · शनिवार, 27 जून 2026
ज्येष्ठ, शुक्ल · तिथि 13
सूर्योदय
05:17सूर्यास्त
19:05चंद्रोदय
17:07चंद्रास्त
02:45चंद्रोदय और चंद्रास्त इस स्थान पर कैलेंडर दिन (मध्यरात्रि से मध्यरात्रि) के लिए हैं। चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देर से उगता है, इसलिए कुछ तिथियों पर वह उस दिन के भीतर उदय या अस्त नहीं होता। तब डैश का अर्थ है कि घटना पड़ोसी दिन में पड़ती है।
पंचांग के पाँच अंग
| अंग | मान | समाप्ति | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| तिथि | त्रयोदशी फिर चतुर्दशी |
00:43 28 जून 2026 |
जया (विजयी) स्पर्धा, मुकदमा और जिसे जीतना हो उससे संबद्ध। |
| नक्षत्र | अनुराधा फिर ज्येष्ठा |
22:11 | मित्र — मैत्री और गठबंधन। भक्ति, सहयोग और अकेले नहीं बल्कि औरों के साथ मिलकर पाई गई सफलता। |
| योग | साध्य फिर शुभ |
12:32 | शुभ मुहूर्त-साहित्य में शुभ योगों में गिना जाता है। |
| करण | कौलव फिर तैतिल · 00:43 (28 जून 2026) तक फिर गर |
11:32 | सात चर करणों में से एक, जो मास भर दोहराते रहते हैं। |
| वार | शनिवार | — | शनि का दिन। श्रम, लोहा और दीर्घ उपक्रमों से संबद्ध। |
मुहूर्त-वर्गीकरण शास्त्रीय मुहूर्त-साहित्य (मुहूर्त चिंतामणि तथा पंचांग परंपरा) से। ये चयन के नियम हैं, भविष्यवाणी नहीं।
दिन के काल
- सूर्योदय 05:17
- सूर्यास्त 19:05
- परंपरा में त्याज्य
- परंपरा में शुभ
सूर्य और मुहूर्त
| काल | से | तक | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 05:17 | — | |
| सूर्यास्त | 19:05 | — | |
| राहु काल | 08:44 | 10:28 | लगभग 90 मिनट की अशुभ अवधि, जिसका स्थान वार से तय होता है। शास्त्र इसमें कोई नया कार्य आरंभ करने से मना करते हैं। |
| गुलिक | 05:17 | 07:01 | शनि की उप-अवधि; राहु काल जैसे ही कारणों से वर्जित, और प्रभाव में अधिक स्थायी मानी जाती है। |
| यमगण्ड | 13:55 | 15:38 | तीसरी अशुभ अवधि, यह भी वार से निश्चित। |
| अभिजित | 11:44 | 12:39 | दिन का आठवाँ मुहूर्त, जो स्थानीय मध्याह्न पर पड़ता है। परंपरा में दिन की सर्वाधिक शुभ अवधि और आरंभ के लिए मानक विकल्प। |
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:56 | 04:37 | भोर से पहले: परंपरा से जागने, प्रार्थना, ध्यान और अध्ययन का समय। |
| प्रातः संध्या | 04:16 | 05:17 | भोर की संध्या, सूर्योदय पर समाप्त: प्रातः पूजा का समय। |
| विजय मुहूर्त | 14:29 | 15:24 | यात्रा आरंभ करने और सफलता चाहने वाले कार्यों के लिए शुभ। |
| गोधूलि मुहूर्त | 19:05 | 19:25 | सूर्यास्त का गोधूलि बेला: कई क्षेत्रों में विवाह के लिए शुभ। |
| सायाह्न संध्या | 19:05 | 20:06 | संध्या समय की संध्या, सूर्यास्त से: सायं पूजा का समय। |
| निशीथ मुहूर्त | 23:51 | 00:32 28 जून 2026 |
मध्यरात्रि का मुहूर्त, अभिजित का प्रतिरूप: शिव और काली की पूजा के लिए, जैसे शिवरात्रि पर। |
| दुर्मुहूर्त | 05:17 | 06:13 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| दुर्मुहूर्त | 06:13 | 07:08 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| अमृत काल | 10:31 | 12:19 | लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो सूर्य से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है: शुभ काम शुरू करने के लिए उत्तम माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 04:28 28 जून 2026 |
06:16 28 जून 2026 |
चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
दिन एक नज़र में
- दिनमान
- 13 घं 47 मि
- रात्रिमान
- 10 घं 12 मि
- मध्याह्न
- 12:11
- दिशा शूल — यात्रा के लिए वर्जित दिशा
- पूर्व
सूर्योदय तब माना गया है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित — दृक् पंचांग की परिपाटी। सूर्य के केंद्र को मानने वाले पंचांगों में दो से चार मिनट का अंतर हो सकता है।
दिन का और विवरण
- चंद्र राशि
- वृश्चिक
- सूर्य राशि
- मिथुन
- नक्षत्र पद
- अनुराधा पद 2 · 08:43 तक
अनुराधा पद 3 · 15:27 तक
अनुराधा पद 4 · 22:11 तक
ज्येष्ठा पद 1 · 04:55 (28 जून 2026) तक
ज्येष्ठा पद 2 - सूर्य नक्षत्र
- आर्द्रा पद 2
- आनन्दादि योग
- अमृत · 22:11 तक
फिर मुसल - शक संवत्
- 1948 पराभव
- विक्रम संवत्
- 2083
- गुजराती संवत्
- 2082 पिंगल
- ऋतु (चान्द्र मास से)
- ग्रीष्म
- ऋतु (सूर्य की ऋतु से)
- वर्षा
- अयन (निरयन)
- उत्तरायण
- अयन (संक्रांति-बिंदु से)
- दक्षिणायन
- चन्द्र वास (चन्द्रमा की दिशा)
- उत्तर
- राहु वास (राहु की दिशा)
- पूर्व
शक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को और गुजराती वर्ष दीवाली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को बदलता है। दोनों ऋतुएँ इसलिए अलग हैं कि एक चान्द्र मास से चलती है और दूसरी सूर्य की वास्तविक ऋतु से।
| काल | से | तक | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| रवि योग | 22:11 | 05:18 28 जून 2026 |
जब चन्द्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 4वाँ, 6ठा, 9वाँ, 10वाँ, 13वाँ या 20वाँ हो: दिन के कई दोष दूर करने वाला माना जाता है, इसलिए कार्यारम्भ के लिए खोजा जाता है। |
| भद्रा | आज नहीं | विष्टि करण। इसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं, विशेषकर जब भद्रा पृथ्वी पर वास करती मानी जाती है; स्वर्ग या पाताल में हो तो यहाँ हानिरहित मानी जाती है। | |
| गण्ड मूल | 22:11 | 05:18 28 जून 2026 |
चन्द्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में, जल और अग्नि राशियों के संधि-नक्षत्र। इसमें जन्म होने पर परम्परा से शान्ति कराई जाती है। |
| पंचक | आज नहीं | चन्द्रमा कुम्भ या मीन में, धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अन्त तक। परम्परा से दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और लकड़ी इकट्ठा करना टाला जाता है। | |
चौघड़िया
रात्रि क्रम चक्र के भिन्न बिंदु से आरंभ होता है, इसीलिए दोनों अलग-अलग दिए गए हैं, एक से दूसरा निकाला नहीं गया।
दिन
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| काल | 05:17 | 07:01 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| शुभ | 07:01 | 08:44 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| रोग | 08:44 | 10:28 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| उद्वेग | 10:28 | 12:11 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| चल | 12:11 | 13:55 | सम यात्रा और आवागमन |
| लाभ | 13:55 | 15:38 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 15:38 | 17:21 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| काल | 17:21 | 19:05 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
रात
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| लाभ | 19:05 | 20:21 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 20:21 | 21:38 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| शुभ | 21:38 | 22:55 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| अमृत | 22:55 | 00:11 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| चल | 00:11 | 01:28 | सम यात्रा और आवागमन |
| रोग | 01:28 | 02:44 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| काल | 02:44 | 04:01 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| लाभ | 04:01 | 05:18 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
गौरी पंचांगम्
तमिल पद्धति दिन के उन्हीं आठ भागों को अलग नामों से पुकारती है। यह अनुवाद नहीं, अलग तालिका है — दोनों में मतभेद है कि दिन का कौन-सा भाग शुभ है।
| गौरी | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| सुगम् | 05:17 | 07:01 | शुभ यात्रा, सुगमता, आतिथ्य |
| अमृतम् | 07:01 | 08:44 | सर्वोत्तम कोई भी मंगल कार्य |
| उथि | 08:44 | 10:28 | सम सामान्य कार्य |
| सोरम् | 10:28 | 12:11 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| रोगम् | 12:11 | 13:55 | वर्जित केवल औषधि |
| विषम् | 13:55 | 15:38 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| लाभम् | 15:38 | 17:21 | शुभ लाभ, नया कार्य |
| धनम् | 17:21 | 19:05 | शुभ धन, क्रय, व्यापार |
होरा
सूर्योदय से चौबीस होरा, कैल्डियन क्रम में। ये असमान होती हैं — बारह दिन-होरा दिन को और बारह रात्रि-होरा रात को बाँटती हैं — इसलिए गर्मियों में दिन-होरा एक घंटे से लंबी और रात्रि-होरा छोटी होती है। किसी भी दिन की पहली होरा उसी दिन के स्वामी की होती है, और वहीं से वारों के नाम आए हैं।
| # | होरा स्वामी | से | तक | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | शनि | 05:17 | 06:26 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 2 | गुरु | 06:26 | 07:35 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 3 | मंगल | 07:35 | 08:44 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 4 | सूर्य | 08:44 | 09:53 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 5 | शुक्र | 09:53 | 11:02 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 6 | बुध | 11:02 | 12:11 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 7 | चंद्र | 12:11 | 13:20 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 8 | शनि | 13:20 | 14:29 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 9 | गुरु | 14:29 | 15:38 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 10 | मंगल | 15:38 | 16:47 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 11 | सूर्य | 16:47 | 17:56 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 12 | शुक्र | 17:56 | 19:05 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 13 रात्रि | बुध | 19:05 | 19:56 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 14 रात्रि | चंद्र | 19:56 | 20:47 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 15 रात्रि | शनि | 20:47 | 21:38 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 16 रात्रि | गुरु | 21:38 | 22:29 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 17 रात्रि | मंगल | 22:29 | 23:20 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 18 रात्रि | सूर्य | 23:20 | 00:11 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 19 रात्रि | शुक्र | 00:11 | 01:02 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 20 रात्रि | बुध | 01:02 | 01:53 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 21 रात्रि | चंद्र | 01:53 | 02:44 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 22 रात्रि | शनि | 02:44 | 03:36 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 23 रात्रि | गुरु | 03:36 | 04:27 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 24 रात्रि | मंगल | 04:27 | 05:18 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
त्योहार और व्रत
| चंद्रमास (अमांत) | ज्येष्ठ |
|---|---|
| चंद्रमास (पूर्णिमांत) | ज्येष्ठ |
| पक्ष | शुक्ल |
| तिथि | 13 |
प्रदोष — त्रयोदशी की संध्या, शिव के लिए