दैनिक पंचांग
कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत · गुरुवार, 22 अक्तू 2026
आश्विन, शुक्ल · तिथि 11
सूर्योदय
05:35सूर्यास्त
17:05चंद्रोदय
14:32चंद्रास्त
01:41चंद्रोदय और चंद्रास्त इस स्थान पर कैलेंडर दिन (मध्यरात्रि से मध्यरात्रि) के लिए हैं। चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देर से उगता है, इसलिए कुछ तिथियों पर वह उस दिन के भीतर उदय या अस्त नहीं होता। तब डैश का अर्थ है कि घटना पड़ोसी दिन में पड़ती है।
पंचांग के पाँच अंग
| अंग | मान | समाप्ति | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| तिथि | एकादशी | 14:48 | नंदा (आनंददायी) शास्त्रों में उत्सव, कला और आनंद हेतु आरंभ किए कार्यों के लिए उपयुक्त। |
| नक्षत्र | शतभिषा | 20:46 | 'सौ वैद्य'। चिकित्सा, गोपनीयता और एकाकी अन्वेषक प्रवृत्ति। |
| योग | वृद्धि | 23:35 | शुभ मुहूर्त-साहित्य में शुभ योगों में गिना जाता है। |
| करण | विष्टि | 14:48 | यह विष्टि (भद्रा) है — वह करण जिससे शास्त्र शुभ आरंभ के लिए बचने को कहते हैं। |
| वार | गुरुवार | — | गुरु का दिन। आरंभ के लिए परंपरागत रूप से सर्वाधिक शुभ। |
मुहूर्त-वर्गीकरण शास्त्रीय मुहूर्त-साहित्य (मुहूर्त चिंतामणि तथा पंचांग परंपरा) से। ये चयन के नियम हैं, भविष्यवाणी नहीं।
दिन के काल
- सूर्योदय 05:35
- सूर्यास्त 17:05
- परंपरा में त्याज्य
- परंपरा में शुभ
सूर्य और मुहूर्त
| काल | से | तक | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 05:35 | — | |
| सूर्यास्त | 17:05 | — | |
| राहु काल | 12:47 | 14:13 | लगभग 90 मिनट की अशुभ अवधि, जिसका स्थान वार से तय होता है। शास्त्र इसमें कोई नया कार्य आरंभ करने से मना करते हैं। |
| गुलिक | 08:28 | 09:54 | शनि की उप-अवधि; राहु काल जैसे ही कारणों से वर्जित, और प्रभाव में अधिक स्थायी मानी जाती है। |
| यमगण्ड | 05:35 | 07:02 | तीसरी अशुभ अवधि, यह भी वार से निश्चित। |
| अभिजित | 10:57 | 11:43 | दिन का आठवाँ मुहूर्त, जो स्थानीय मध्याह्न पर पड़ता है। परंपरा में दिन की सर्वाधिक शुभ अवधि और आरंभ के लिए मानक विकल्प। |
सूर्योदय ऊपरी किनारे के लिए वायुमंडलीय अपवर्तन सहित गणित है — दृक् परंपरा। बिंब-केंद्र लेने पर इस पृष्ठ का हर समय दो से चार मिनट बदल जाता, इसीलिए यह चुनाव बताया गया है, मान नहीं लिया गया।
चौघड़िया
रात्रि क्रम चक्र के भिन्न बिंदु से आरंभ होता है, इसीलिए दोनों अलग-अलग दिए गए हैं, एक से दूसरा निकाला नहीं गया।
दिन
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| शुभ | 05:35 | 07:02 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| रोग | 07:02 | 08:28 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| उद्वेग | 08:28 | 09:54 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| चल | 09:54 | 11:20 | सम यात्रा और आवागमन |
| लाभ | 11:20 | 12:47 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 12:47 | 14:13 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| काल | 14:13 | 15:39 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| शुभ | 15:39 | 17:05 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
रात
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृत | 17:05 | 18:39 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| चल | 18:39 | 20:13 | सम यात्रा और आवागमन |
| रोग | 20:13 | 21:47 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| काल | 21:47 | 23:21 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| लाभ | 23:21 | 00:54 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 00:54 | 02:28 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| शुभ | 02:28 | 04:02 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| अमृत | 04:02 | 05:36 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
गौरी पंचांगम्
तमिल पद्धति दिन के उन्हीं आठ भागों को अलग नामों से पुकारती है। यह अनुवाद नहीं, अलग तालिका है — दोनों में मतभेद है कि दिन का कौन-सा भाग शुभ है।
| गौरी | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृतम् | 05:35 | 07:02 | सर्वोत्तम कोई भी मंगल कार्य |
| उथि | 07:02 | 08:28 | सम सामान्य कार्य |
| सोरम् | 08:28 | 09:54 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| रोगम् | 09:54 | 11:20 | वर्जित केवल औषधि |
| विषम् | 11:20 | 12:47 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| लाभम् | 12:47 | 14:13 | शुभ लाभ, नया कार्य |
| धनम् | 14:13 | 15:39 | शुभ धन, क्रय, व्यापार |
| सुगम् | 15:39 | 17:05 | शुभ यात्रा, सुगमता, आतिथ्य |
होरा
सूर्योदय से चौबीस होरा, कैल्डियन क्रम में। ये असमान होती हैं — बारह दिन-होरा दिन को और बारह रात्रि-होरा रात को बाँटती हैं — इसलिए गर्मियों में दिन-होरा एक घंटे से लंबी और रात्रि-होरा छोटी होती है। किसी भी दिन की पहली होरा उसी दिन के स्वामी की होती है, और वहीं से वारों के नाम आए हैं।
| # | होरा स्वामी | से | तक | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गुरु | 05:35 | 06:33 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 2 | मंगल | 06:33 | 07:30 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 3 | सूर्य | 07:30 | 08:28 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 4 | शुक्र | 08:28 | 09:25 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 5 | बुध | 09:25 | 10:23 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 6 | चंद्र | 10:23 | 11:20 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 7 | शनि | 11:20 | 12:18 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 8 | गुरु | 12:18 | 13:15 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 9 | मंगल | 13:15 | 14:13 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 10 | सूर्य | 14:13 | 15:10 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 11 | शुक्र | 15:10 | 16:08 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 12 | बुध | 16:08 | 17:05 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 13 रात्रि | चंद्र | 17:05 | 18:08 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 14 रात्रि | शनि | 18:08 | 19:10 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 15 रात्रि | गुरु | 19:10 | 20:13 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 16 रात्रि | मंगल | 20:13 | 21:16 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 17 रात्रि | सूर्य | 21:16 | 22:18 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 18 रात्रि | शुक्र | 22:18 | 23:21 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 19 रात्रि | बुध | 23:21 | 00:23 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 20 रात्रि | चंद्र | 00:23 | 01:26 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 21 रात्रि | शनि | 01:26 | 02:28 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 22 रात्रि | गुरु | 02:28 | 03:31 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 23 रात्रि | मंगल | 03:31 | 04:33 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 24 रात्रि | सूर्य | 04:33 | 05:36 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
त्योहार और व्रत
| चंद्रमास (अमांत) | आश्विन |
|---|---|
| चंद्रमास (पूर्णिमांत) | आश्विन |
| पक्ष | शुक्ल |
| तिथि | 11 |
एकादशी — व्रत का दिन, प्रत्येक चांद्र मास में दो बार