दैनिक पंचांग
पुणे, महाराष्ट्र, भारत · शुक्रवार, 15 मई 2026
वैशाख, कृष्ण · तिथि 13
सूर्योदय
06:00सूर्यास्त
19:01चंद्रोदय
04:22चंद्रास्त
17:33चंद्रोदय और चंद्रास्त इस स्थान पर कैलेंडर दिन (मध्यरात्रि से मध्यरात्रि) के लिए हैं। चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देर से उगता है, इसलिए कुछ तिथियों पर वह उस दिन के भीतर उदय या अस्त नहीं होता। तब डैश का अर्थ है कि घटना पड़ोसी दिन में पड़ती है।
पंचांग के पाँच अंग
| अंग | मान | समाप्ति | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| तिथि | त्रयोदशी फिर चतुर्दशी · 05:11 (16 मई 2026) तक फिर अमावस्या |
08:31 | जया (विजयी) स्पर्धा, मुकदमा और जिसे जीतना हो उससे संबद्ध। |
| नक्षत्र | अश्विनी फिर भरणी |
20:14 | गति, आरोग्य और नई शुरुआत से जुड़ा नक्षत्र। अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं; शास्त्र इसे रोगमुक्ति, पहल और परिस्थिति के पूर्ण होने से पहले ही आरम्भ कर देने की प्रवृत्ति से जोड़ते हैं। |
| योग | आयुष्मान् फिर सौभाग्य |
14:21 | शुभ मुहूर्त-साहित्य में शुभ योगों में गिना जाता है। |
| करण | वणिज फिर विष्टि · 18:54 तक फिर शकुनि · 05:11 (16 मई 2026) तक फिर चतुष्पद |
08:31 | सात चर करणों में से एक, जो मास भर दोहराते रहते हैं। |
| वार | शुक्रवार | — | शुक्र का दिन। विवाह, कला और क्रय के लिए शुभ। |
मुहूर्त-वर्गीकरण शास्त्रीय मुहूर्त-साहित्य (मुहूर्त चिंतामणि तथा पंचांग परंपरा) से। ये चयन के नियम हैं, भविष्यवाणी नहीं।
दिन के काल
- सूर्योदय 06:00
- सूर्यास्त 19:01
- परंपरा में त्याज्य
- परंपरा में शुभ
सूर्य और मुहूर्त
| काल | से | तक | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 06:00 | — | |
| सूर्यास्त | 19:01 | — | |
| राहु काल | 10:53 | 12:31 | लगभग 90 मिनट की अशुभ अवधि, जिसका स्थान वार से तय होता है। शास्त्र इसमें कोई नया कार्य आरंभ करने से मना करते हैं। |
| गुलिक | 07:38 | 09:15 | शनि की उप-अवधि; राहु काल जैसे ही कारणों से वर्जित, और प्रभाव में अधिक स्थायी मानी जाती है। |
| यमगण्ड | 15:46 | 17:23 | तीसरी अशुभ अवधि, यह भी वार से निश्चित। |
| अभिजित | 12:05 | 12:57 | दिन का आठवाँ मुहूर्त, जो स्थानीय मध्याह्न पर पड़ता है। परंपरा में दिन की सर्वाधिक शुभ अवधि और आरंभ के लिए मानक विकल्प। |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:32 | 05:16 | भोर से पहले: परंपरा से जागने, प्रार्थना, ध्यान और अध्ययन का समय। |
| प्रातः संध्या | 04:54 | 06:00 | भोर की संध्या, सूर्योदय पर समाप्त: प्रातः पूजा का समय। |
| विजय मुहूर्त | 14:41 | 15:33 | यात्रा आरंभ करने और सफलता चाहने वाले कार्यों के लिए शुभ। |
| गोधूलि मुहूर्त | 19:01 | 19:23 | सूर्यास्त का गोधूलि बेला: कई क्षेत्रों में विवाह के लिए शुभ। |
| सायाह्न संध्या | 19:01 | 20:07 | संध्या समय की संध्या, सूर्यास्त से: सायं पूजा का समय। |
| निशीथ मुहूर्त | 00:08 | 00:52 16 मई 2026 |
मध्यरात्रि का मुहूर्त, अभिजित का प्रतिरूप: शिव और काली की पूजा के लिए, जैसे शिवरात्रि पर। |
| दुर्मुहूर्त | 08:36 | 09:28 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| दुर्मुहूर्त | 12:57 | 13:49 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| अमृत काल | 13:44 | 15:11 | लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो सूर्य से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है: शुभ काम शुरू करने के लिए उत्तम माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 16:38 | 18:04 | चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 04:45 16 मई 2026 |
06:10 16 मई 2026 |
चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
दिन एक नज़र में
- दिनमान
- 13 घं 0 मि
- रात्रिमान
- 10 घं 59 मि
- मध्याह्न
- 12:31
- दिशा शूल — यात्रा के लिए वर्जित दिशा
- पश्चिम
सूर्योदय तब माना गया है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर आता है, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित — दृक् पंचांग की परिपाटी। सूर्य के केंद्र को मानने वाले पंचांगों में दो से चार मिनट का अंतर हो सकता है।
दिन का और विवरण
- चंद्र राशि
- मेष
- सूर्य राशि
- मेष · 06:21 तक
फिर वृषभ - नक्षत्र पद
- अश्विनी पद 2 · 09:28 तक
अश्विनी पद 3 · 14:52 तक
अश्विनी पद 4 · 20:14 तक
भरणी पद 1 · 01:35 (16 मई 2026) तक
भरणी पद 2 - सूर्य नक्षत्र
- कृत्तिका पद 1 · 06:21 तक
फिर कृत्तिका पद 2 - आनन्दादि योग
- वज्र · 20:14 तक
फिर मुद्गर - शक संवत्
- 1948 पराभव
- विक्रम संवत्
- 2083 सिद्धार्थी
- गुजराती संवत्
- 2082 पिंगल
- ऋतु (चान्द्र मास से)
- वसन्त
- ऋतु (सूर्य की ऋतु से)
- ग्रीष्म
- अयन (निरयन)
- उत्तरायण
- अयन (संक्रांति-बिंदु से)
- उत्तरायण
- चन्द्र वास (चन्द्रमा की दिशा)
- पूर्व
- राहु वास (राहु की दिशा)
- आग्नेय
- बृहस्पति संवत्सर
- रौद्र · 16:15 (17 अप्रै 2027) तक
शक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को और गुजराती वर्ष दीवाली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को बदलता है। दोनों ऋतुएँ इसलिए अलग हैं कि एक चान्द्र मास से चलती है और दूसरी सूर्य की वास्तविक ऋतु से।
| काल | से | तक | शास्त्र क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| रवि योग | आज नहीं | जब चन्द्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 4वाँ, 6ठा, 9वाँ, 10वाँ, 13वाँ या 20वाँ हो: दिन के कई दोष दूर करने वाला माना जाता है, इसलिए कार्यारम्भ के लिए खोजा जाता है। | |
| भद्रा | 08:31 | 18:54 | विष्टि करण। इसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं, विशेषकर जब भद्रा पृथ्वी पर वास करती मानी जाती है; स्वर्ग या पाताल में हो तो यहाँ हानिरहित मानी जाती है। स्वर्ग में |
| गण्ड मूल | 06:00 | 20:14 | चन्द्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में, जल और अग्नि राशियों के संधि-नक्षत्र। इसमें जन्म होने पर परम्परा से शान्ति कराई जाती है। |
| पंचक | आज नहीं | चन्द्रमा कुम्भ या मीन में, धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अन्त तक। परम्परा से दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और लकड़ी इकट्ठा करना टाला जाता है। | |
| बाण: अग्नि | 06:00 | 06:21 | राशि में सूर्य के अंश से तय होता है, इसलिए हर बाण लगभग एक दिन रहता है। मुहूर्त ग्रंथ औषधि के लिए रोग, निर्माण के लिए अग्नि, शासन से व्यवहार के लिए राज, यात्रा के लिए चोर और विवाह के लिए मृत्यु बाण टालते हैं। |
चन्द्रबल और ताराबल
आपकी अपनी जन्म राशि या नक्षत्र के लिए: सूची में हो तो दिन आपके अनुकूल है। चन्द्र राशि आपकी राशि से गिनी जाती है (1, 3, 6, 7, 10, 11 शुभ) और चन्द्र नक्षत्र आपके नक्षत्र से नौ-नौ के समूह में (सम्पत्, क्षेम, साधक, मित्र, परम मित्र शुभ)।
- चन्द्रबल
- मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ
अष्टम चन्द्र: कन्या - ताराबल · 20:14 तक
- भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, रेवती
- ताराबल · अगले सूर्योदय तक
- अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तर भाद्रपद
उदय लग्न
| लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| मेष | 04:20 | 06:04 |
| वृषभ | 06:04 | 08:04 |
| मिथुन | 08:04 | 10:17 |
| कर्क | 10:17 | 12:30 |
| सिंह | 12:30 | 14:37 |
| कन्या | 14:37 | 16:44 |
| तुला | 16:44 | 18:55 |
| वृश्चिक | 18:55 | 21:09 |
| धनु | 21:09 | 23:15 |
| मकर | 23:15 | 01:04 16 मई 2026 |
| कुम्भ | 01:04 16 मई 2026 | 02:42 16 मई 2026 |
| मीन | 02:42 16 मई 2026 | 04:16 16 मई 2026 |
पंचक रहित मुहूर्त
| काल | से | तक |
|---|---|---|
| पंचक रहित (शुभ) | 06:00 | 06:04 |
| मृत्यु | 06:04 | 08:04 |
| अग्नि | 08:04 | 08:31 |
| पंचक रहित (शुभ) | 08:31 | 10:17 |
| राज | 10:17 | 12:30 |
| पंचक रहित (शुभ) | 12:30 | 14:37 |
| चोर | 14:37 | 16:44 |
| पंचक रहित (शुभ) | 16:44 | 18:55 |
| रोग | 18:55 | 20:14 |
| पंचक रहित (शुभ) | 20:14 | 21:09 |
| मृत्यु | 21:09 | 23:15 |
| अग्नि | 23:15 | 01:04 16 मई 2026 |
| पंचक रहित (शुभ) | 01:04 16 मई 2026 | 02:42 16 मई 2026 |
| राज | 02:42 16 मई 2026 | 04:16 16 मई 2026 |
| अग्नि | 04:16 16 मई 2026 | 05:11 16 मई 2026 |
| पंचक रहित (शुभ) | 05:11 16 मई 2026 | 06:00 16 मई 2026 |
सूर्योदय के समय उदित लग्न से आरम्भ करके दिन भर पूर्व में उदित होने वाली निरयन राशि। पंचक रहित मुहूर्त दिन को वहाँ काटता है जहाँ लग्न, तिथि या नक्षत्र बदलते हैं और वार सहित चारों को जोड़ता है: शेष 1, 2, 4, 6 और 8 पाँच पंचक बताते हैं, बाकी पंचक रहित हैं।
चौघड़िया
रात्रि क्रम चक्र के भिन्न बिंदु से आरंभ होता है, इसीलिए दोनों अलग-अलग दिए गए हैं, एक से दूसरा निकाला नहीं गया।
दिन
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| चल | 06:00 | 07:38 | सम यात्रा और आवागमन |
| लाभ | 07:38 | 09:15 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 09:15 | 10:53 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| काल | 10:53 | 12:31 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| शुभ | 12:31 | 14:08 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| रोग | 14:08 | 15:46 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| उद्वेग | 15:46 | 17:23 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| चल | 17:23 | 19:01 | सम यात्रा और आवागमन |
रात
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| रोग | 19:01 | 20:23 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| काल | 20:23 | 21:45 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| लाभ | 21:45 | 23:08 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 23:08 | 00:30 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| शुभ | 00:30 | 01:53 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| अमृत | 01:53 | 03:15 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| चल | 03:15 | 04:38 | सम यात्रा और आवागमन |
| रोग | 04:38 | 06:00 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
गौरी पंचांगम्
तमिल पद्धति दिन के उन्हीं आठ भागों को अलग नामों से पुकारती है। यह अनुवाद नहीं, अलग तालिका है — दोनों में मतभेद है कि दिन का कौन-सा भाग शुभ है।
| गौरी | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| विषम् | 06:00 | 07:38 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| लाभम् | 07:38 | 09:15 | शुभ लाभ, नया कार्य |
| धनम् | 09:15 | 10:53 | शुभ धन, क्रय, व्यापार |
| सुगम् | 10:53 | 12:31 | शुभ यात्रा, सुगमता, आतिथ्य |
| अमृतम् | 12:31 | 14:08 | सर्वोत्तम कोई भी मंगल कार्य |
| उथि | 14:08 | 15:46 | सम सामान्य कार्य |
| सोरम् | 15:46 | 17:23 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| रोगम् | 17:23 | 19:01 | वर्जित केवल औषधि |
होरा
सूर्योदय से चौबीस होरा, कैल्डियन क्रम में। ये असमान होती हैं — बारह दिन-होरा दिन को और बारह रात्रि-होरा रात को बाँटती हैं — इसलिए गर्मियों में दिन-होरा एक घंटे से लंबी और रात्रि-होरा छोटी होती है। किसी भी दिन की पहली होरा उसी दिन के स्वामी की होती है, और वहीं से वारों के नाम आए हैं।
| # | होरा स्वामी | से | तक | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | शुक्र | 06:00 | 07:05 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 2 | बुध | 07:05 | 08:10 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 3 | चंद्र | 08:10 | 09:15 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 4 | शनि | 09:15 | 10:20 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 5 | गुरु | 10:20 | 11:26 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 6 | मंगल | 11:26 | 12:31 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 7 | सूर्य | 12:31 | 13:36 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 8 | शुक्र | 13:36 | 14:41 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 9 | बुध | 14:41 | 15:46 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 10 | चंद्र | 15:46 | 16:51 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 11 | शनि | 16:51 | 17:56 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 12 | गुरु | 17:56 | 19:01 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 13 रात्रि | मंगल | 19:01 | 19:56 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 14 रात्रि | सूर्य | 19:56 | 20:50 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 15 रात्रि | शुक्र | 20:50 | 21:45 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 16 रात्रि | बुध | 21:45 | 22:40 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 17 रात्रि | चंद्र | 22:40 | 23:35 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 18 रात्रि | शनि | 23:35 | 00:30 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 19 रात्रि | गुरु | 00:30 | 01:25 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 20 रात्रि | मंगल | 01:25 | 02:20 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 21 रात्रि | सूर्य | 02:20 | 03:15 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 22 रात्रि | शुक्र | 03:15 | 04:10 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 23 रात्रि | बुध | 04:10 | 05:05 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 24 रात्रि | चंद्र | 05:05 | 06:00 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
त्योहार और व्रत
| चंद्रमास (अमांत) | वैशाख |
|---|---|
| चंद्रमास (पूर्णिमांत) | ज्येष्ठ |
| पक्ष | कृष्ण |
| तिथि | 13 |
दोनों पद्धतियाँ इस मास को अलग नाम देती हैं — एक ही दिन, दो सही नाम।
प्रदोष — त्रयोदशी की संध्या, शिव के लिए