दैनिक पंचांग
हैदराबाद, तेलंगणा, भारत · शनिवार, 11 मार्च 2028
फाल्गुन, शुक्ल · तिथी 15
हा दिवस, सोप्या शब्दांत
- तिथी
- पौर्णिमा · 06:36 पर्यंत
- नक्षत्र
- पूर्वा फाल्गुनी · 06:29 पर्यंत
- काही सुरू करण्यासाठी चांगली वेळ
- 12:02–12:50 · अभिजित
- नवीन काम सुरू करणे टाळा
- 09:26–10:56 · राहुकाळ
- सण
- होळी / धुळवड
सर्व वेळा हैदराबाद, तेलंगणा, भारत साठी आहेत. त्या ठिकाणानुसार बदलतात.
सूर्योदय
06:27सूर्यास्त
18:25चंद्रोदय
18:50चंद्रास्त
06:18चंद्रोदय आणि चंद्रास्त या ठिकाणच्या या कॅलेंडर दिवसासाठी (मध्यरात्र ते मध्यरात्र) आहेत. चंद्र रोज सुमारे 50 मिनिटे उशिरा उगवतो, त्यामुळे काही दिवशी तो उगवत नाही किंवा मावळत नाही. जिथे रेघ आहे, तिथे ते आदल्या किंवा पुढच्या दिवशी होते.
दिवसाची पाच अंगे (पंचांग)
| अंग | मूल्य | समाप्ती | जुने ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| तिथी | पौर्णिमा नंतर कृष्ण प्रतिपदा · 02:56 (12 मार्च 2028) पर्यंत नंतर द्वितीया |
06:36 | पूर्णा (पूर्ण) पूर्णता आणि भरलेपणाची सूचक; विवाह आणि प्रवासासाठी शुभ. |
| नक्षत्र | पूर्वा फाल्गुनी नंतर उत्तरा फाल्गुनी · 03:37 (12 मार्च 2028) पर्यंत नंतर हस्त |
06:29 | विश्रांती, आनंद आणि सहवास. सृजनाआधीचा आराम, आणि जे मिळवले त्याचा उपभोग. |
| योग | शूल नंतर गण्ड |
16:17 | अशुभ नव्या सुरुवातीसाठी ज्या योगांपासून दूर राहावे असे ग्रंथ सांगतात, त्यांपैकी एक. |
| करण | बव नंतर बालव · 16:44 पर्यंत नंतर कौलव · 02:56 (12 मार्च 2028) पर्यंत नंतर तैतिल |
06:36 | सात चर करणांपैकी एक, जी महिनाभर पुन्हा पुन्हा येतात. |
| वार | शनिवार | — | शनीचा दिवस. श्रम, लोखंड आणि दीर्घ उपक्रमांशी संबंधित. |
या शुभ-अशुभ वेळा मुहूर्त चिंतामणीसारख्या शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथांमधून घेतल्या आहेत. वेळ निवडण्याचे हे पारंपरिक नियम आहेत, भाकिते नाहीत.
टाळायच्या वेळा, आणि दुपारची चांगली वेळ
- सूर्योदय 06:27
- सूर्यास्त 18:25
- परंपरेत त्याज्य
- परंपरेत शुभ
सूर्योदय, सूर्यास्त आणि शुभ-अशुभ वेळा (मुहूर्त)
| कालखंड | पासून | पर्यंत | जुने ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 06:27 | — | |
| सूर्यास्त | 18:25 | — | |
| राहुकाळ | 09:26 | 10:56 | सुमारे दीड तासाचा काळ, जो वारानुसार बदलतो. परंपरेनुसार या वेळेत नवीन काही सुरू करू नये. |
| गुलिक | 06:27 | 07:56 | दिवसातील शनीचा भाग. राहुकाळाच्या कारणांसाठीच ही वेळ टाळली जाते. |
| यमगंड | 13:55 | 15:25 | टाळायची आणखी एक वेळ, तीही वारानुसार ठरते. |
| अभिजित | 12:02 | 12:50 | स्थानिक दुपारच्या आसपासची वेळ. परंपरेनुसार ही दिवसातील सर्वोत्तम वेळ आहे, आणि दुसरी कोणतीही चांगली वेळ उपलब्ध नसेल तेव्हा हीच वापरतात. बुधवारी वापरली जात नाही. |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:50 | 05:38 | पहाटेपूर्वी: परंपरेने उठणे, प्रार्थना, ध्यान आणि अभ्यासाची वेळ. |
| प्रातः संध्या | 05:14 | 06:27 | पहाटेची संध्या, सूर्योदयाला संपणारी: सकाळच्या पूजेची वेळ. |
| विजय मुहूर्त | 14:25 | 15:13 | प्रवासाला निघण्यासाठी आणि यश हवे असलेल्या कामांसाठी शुभ. |
| गोधूलि मुहूर्त | 18:25 | 18:49 | सूर्यास्ताची गोरज वेळ: अनेक प्रदेशांत विवाहासाठी शुभ. |
| सायाह्न संध्या | 18:25 | 19:37 | सायंकाळची संध्या, सूर्यास्तापासून: सायंकाळच्या पूजेची वेळ. |
| निशीथ मुहूर्त | 00:01 | 00:49 12 मार्च 2028 |
मध्यरात्रीचा मुहूर्त, अभिजितचा प्रतिरूप: शिव आणि कालीच्या पूजेसाठी, जसे शिवरात्रीला. |
| दुर्मुहूर्त | 06:27 | 07:15 | शुभ कार्यांच्या सुरुवातीसाठी वर्ज्य. |
| दुर्मुहूर्त | 07:15 | 08:02 | शुभ कार्यांच्या सुरुवातीसाठी वर्ज्य. |
| अमृत काळ | 21:16 | 22:41 | सुमारे दीड तासाचा काळ, जो सूर्यावरून नव्हे तर चंद्राच्या नक्षत्रावरून ठरतो: शुभ कार्याची सुरुवात करण्यासाठी उत्तम मानला जातो. |
| वर्ज्यम् | 12:50 | 14:14 | चंद्राच्या नक्षत्रावरून ठरणारा सुमारे दीड तासाचा काळ, ज्याला त्याज्यम् असेही म्हणतात: यात नवी कामे सुरू करत नाहीत. दक्षिण भारतात राहु काळाबरोबर विशेष पाळला जातो. |
दिवसाची माहिती
- दिनमान
- 11 ता 58 मि
- रात्रिमान
- 12 ता 1 मि
- मध्यान्ह
- 12:26
- आज प्रवासासाठी टाळायची दिशा (दिशा शूल)
- पूर्व
इथे सूर्योदय म्हणजे सूर्याची वरची कडा दिसू लागते ती वेळ, जशी दृक् पंचांगात धरली जाते. सूर्याचा मध्य धरणाऱ्या पंचांगांमध्ये दोन ते चार मिनिटांचा फरक असू शकतो.
चौघडिया
रात्रीचे चौघडिया दिवसाच्या चौघडियापेक्षा वेगळ्या ठिकाणापासून सुरू होतात, म्हणून दोन्ही वेगवेगळे दिले आहेत.
दिवस
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| काल | 06:27 | 07:56 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| शुभ | 07:56 | 09:26 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| रोग | 09:26 | 10:56 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| उद्वेग | 10:56 | 12:26 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| चल | 12:26 | 13:55 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| लाभ | 13:55 | 15:25 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 15:25 | 16:55 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| काल | 16:55 | 18:25 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
रात्र
| चौघडिया | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| लाभ | 18:25 | 19:55 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 19:55 | 21:25 | वर्ज्य फक्त शासकीय काम |
| शुभ | 21:25 | 22:55 | शुभ संस्कार, विवाह, कोणतेही मंगल कार्य |
| अमृत | 22:55 | 00:25 | सर्वोत्तम कोणतेही काम |
| चल | 00:25 | 01:55 | सम प्रवास आणि हालचाल |
| रोग | 01:55 | 03:26 | वर्ज्य फक्त वाद आणि कर्जवसुली |
| काल | 03:26 | 04:56 | वर्ज्य काही मतांनुसार फक्त धनसंचय |
| लाभ | 04:56 | 06:26 | शुभ व्यापार, नवा व्यवसाय, लाभ |
गौरी पंचांगम्
दिवसाचे आठ भाग करण्याची तमिळ पद्धत, वेगळ्या नावांसह. हा स्वतंत्र तक्ता आहे, भाषांतर नाही: दिवसाचा कोणता भाग चांगला, यावर दोन्ही पद्धतींचे नेहमी एकमत नसते.
| गौरी | पासून | पर्यंत | गुण |
|---|---|---|---|
| सुगम् | 06:27 | 07:56 | शुभ प्रवास, सुलभता, आदरातिथ्य |
| अमृतम् | 07:56 | 09:26 | सर्वोत्तम कोणतेही मंगल कार्य |
| उथि | 09:26 | 10:56 | सम सामान्य काम |
| सोरम् | 10:56 | 12:26 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| रोगम् | 12:26 | 13:55 | वर्ज्य फक्त औषध |
| विषम् | 13:55 | 15:25 | वर्ज्य काहीही नवे नाही |
| लाभम् | 15:25 | 16:55 | शुभ लाभ, नवे काम |
| धनम् | 16:55 | 18:25 | शुभ धन, खरेदी, व्यापार |
या दिवसाचा अधिक तपशीलदिवसभरातील चंद्र आणि सूर्याच्या राशी, वर्षे (संवत्), ऋतू, विशेष योग आणि वेळा, चंद्रबळ आणि ताराबळ, दिवसभरातील उदय राशी (लग्न), आणि होरा तक्ता.
दिवसाबद्दल आणखी
- चंद्र राशी
- सिंह · 11:45 पर्यंत
नंतर कन्या - सूर्य राशी
- कुंभ
- नक्षत्र चरण
- पूर्वा फाल्गुनी चरण 4 · 06:29 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 1 · 11:45 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 2 · 17:02 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 3 · 22:19 पर्यंत
उत्तरा फाल्गुनी चरण 4 · 03:37 (12 मार्च 2028) पर्यंत
हस्त चरण 1 - सूर्य नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपदा चरण 3
- आनंदादी योग
- लुम्बक · 06:29 पर्यंत
नंतर उत्पात · 03:37 (12 मार्च 2028) पर्यंत
नंतर मृत्यु - शके
- 1949 प्लवंग
- विक्रम संवत
- 2084 रौद्र
- गुजराती संवत
- 2084 सिद्धार्थी
- ऋतू (चांद्र मासानुसार)
- शिशिर
- ऋतू (सूर्याच्या ऋतूनुसार)
- वसन्त
- अयन (निरयन)
- उत्तरायण
- अयन (अयनांतानुसार)
- उत्तरायण
- चंद्र वास (चंद्राची दिशा)
- पूर्व · 11:45 पर्यंत
नंतर दक्षिण - राहु वास (राहूची दिशा)
- पूर्व
- बृहस्पती संवत्सर
- दुर्मति · 17:02 (12 एप्रि 2028) पर्यंत
शक संवत चैत्र शुद्ध प्रतिपदेला (गुढीपाडव्याला) सुरू होतो, आणि गुजराती वर्ष कार्तिक शुद्ध प्रतिपदेला, म्हणजे दिवाळीच्या दुसऱ्या दिवशी. दोन ऋतू दिले आहेत, कारण एक चांद्र महिन्यानुसार चालतो आणि दुसरा सूर्याच्या प्रत्यक्ष ऋतूनुसार.
| कालखंड | पासून | पर्यंत | जुने ग्रंथ काय सांगतात |
|---|---|---|---|
| रवि योग | आज नाही | चंद्राचे नक्षत्र सूर्याच्या नक्षत्रापासून 4थे, 6वे, 9वे, 10वे, 13वे किंवा 20वे असते तेव्हा: दिवसाचे अनेक दोष दूर करणारा मानला जातो, म्हणून कार्यारंभासाठी शोधला जातो. | |
| भद्रा | आज नाही | विष्टी करण. यात शुभ कार्ये टाळली जातात, विशेषतः भद्रा पृथ्वीवर वास करते असे मानले जाते तेव्हा; स्वर्गात किंवा पाताळात असल्यास येथे निरुपद्रवी मानली जाते. | |
| गंड मूळ | आज नाही | चंद्र अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूळ किंवा रेवतीत, जल आणि अग्नी राशींच्या संधीवरील नक्षत्रे. यात जन्म झाल्यास परंपरेने शांती केली जाते. | |
| पंचक | आज नाही | चंद्र कुंभ किंवा मीनमध्ये, धनिष्ठेच्या उत्तरार्धापासून रेवतीच्या अखेरपर्यंत. परंपरेने दक्षिणेकडील प्रवास, छत घालणे आणि लाकूड गोळा करणे टाळले जाते. | |
| बाण: रोग | 06:27 | 13:03 | राशीतील सूर्याच्या अंशावरून ठरतो, म्हणून प्रत्येक बाण सुमारे एक दिवस राहतो. मुहूर्त ग्रंथ औषधासाठी रोग, बांधकामासाठी अग्नी, शासनाशी व्यवहारासाठी राज, प्रवासासाठी चोर आणि विवाहासाठी मृत्यू बाण टाळतात. |
चंद्रबळ आणि ताराबळ
यांच्या मदतीने तुम्ही हा दिवस तुमच्या स्वतःच्या राशीसाठी (चंद्र राशी) आणि जन्मनक्षत्रासाठी कसा आहे ते तपासू शकता. तुमची राशी किंवा नक्षत्र यादीत असेल, तर हा दिवस तुमच्यासाठी अनुकूल आहे. चंद्रबळात त्या दिवशीच्या चंद्राची राशी तुमच्या राशीपासून मोजली जाते (1ली, 3री, 6वी, 7वी, 10वी आणि 11वी शुभ); ताराबळात त्या दिवशीच्या चंद्राचे नक्षत्र तुमच्या नक्षत्रापासून नऊ-नऊच्या गटांत मोजले जाते.
- चंद्रबळ · 11:45 पर्यंत
- मिथुन, सिंह, तूळ, वृश्चिक, कुंभ, मीन
अष्टम चंद्र: मकर - चंद्रबळ · पुढच्या सूर्योदयापर्यंत
- मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनू, मीन
अष्टम चंद्र: कुंभ - ताराबळ · 06:29 पर्यंत
- अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूळ, उत्तराषाढा, श्रवण, शततारका, उत्तरा भाद्रपदा
- ताराबळ · 03:37 पर्यंत
- भरणी, रोहिणी, मृगशीर्ष, पुनर्वसू, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्वा भाद्रपदा, रेवती
- ताराबळ · पुढच्या सूर्योदयापर्यंत
- अश्विनी, कृत्तिका, मृगशीर्ष, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूळ, उत्तराषाढा, धनिष्ठा, शततारका, उत्तरा भाद्रपदा
उदय लग्न
| लग्न | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| कुंभ | 05:02 | 06:41 |
| मीन | 06:41 | 08:16 |
| मेष | 08:16 | 10:01 |
| वृषभ | 10:01 | 12:02 |
| मिथुन | 12:02 | 14:14 |
| कर्क | 14:14 | 16:26 |
| सिंह | 16:26 | 18:33 |
| कन्या | 18:33 | 20:38 |
| तूळ | 20:38 | 22:48 |
| वृश्चिक | 22:48 | 01:02 12 मार्च 2028 |
| धनू | 01:02 12 मार्च 2028 | 03:08 12 मार्च 2028 |
| मकर | 03:08 12 मार्च 2028 | 04:58 12 मार्च 2028 |
पंचक रहित मुहूर्त
| कालखंड | पासून | पर्यंत |
|---|---|---|
| रोग | 06:27 | 06:29 |
| पंचक रहित (शुभ) | 06:29 | 06:36 |
| मृत्यू | 06:36 | 06:41 |
| अग्नी | 06:41 | 08:16 |
| पंचक रहित (शुभ) | 08:16 | 10:01 |
| मृत्यू | 10:01 | 12:02 |
| अग्नी | 12:02 | 14:14 |
| पंचक रहित (शुभ) | 14:14 | 16:26 |
| राज | 16:26 | 18:33 |
| पंचक रहित (शुभ) | 18:33 | 20:38 |
| चोर | 20:38 | 22:48 |
| पंचक रहित (शुभ) | 22:48 | 01:02 12 मार्च 2028 |
| रोग | 01:02 12 मार्च 2028 | 02:56 12 मार्च 2028 |
| पंचक रहित (शुभ) | 02:56 12 मार्च 2028 | 03:08 12 मार्च 2028 |
| मृत्यू | 03:08 12 मार्च 2028 | 03:37 12 मार्च 2028 |
| अग्नी | 03:37 12 मार्च 2028 | 04:58 12 मार्च 2028 |
| पंचक रहित (शुभ) | 04:58 12 मार्च 2028 | 06:26 12 मार्च 2028 |
पूर्वेला उगवणारी राशी (लग्न) दिवसभर बदलत राहते — सूर्योदयाच्या वेळी उगवणाऱ्या राशीपासून सुरुवात होते. पंचक रहित मुहूर्त पद्धतीत, जिथे लग्न, तिथी किंवा नक्षत्र बदलते तिथे दिवसाचे भाग केले जातात, आणि प्रत्येक भाग पंचकापासून मुक्त (शुभ) आहे की नाही ते दाखवले जाते.
होरा (ग्रहांचे तास)
सूर्योदयापासून सुरू करून दिवस आणि रात्र प्रत्येकी बारा होरांमध्ये विभागले जातात, आणि प्रत्येक होरेचा स्वामी एक ग्रह असतो. दिवसाच्या होरा उजेडाचा वेळ वाटून घेतात आणि रात्रीच्या होरा अंधाराचा, त्यामुळे उन्हाळ्यात दिवसाची होरा एका तासापेक्षा मोठी असते. प्रत्येक दिवसाची पहिली होरा त्या दिवसाच्या ग्रहाची असते, आणि वारांची नावे तिथूनच आली आहेत.
| # | होरा स्वामी | पासून | पर्यंत | कशासाठी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | शनी | 06:27 | 07:26 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 2 | गुरू | 07:26 | 08:26 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 3 | मंगळ | 08:26 | 09:26 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 4 | सूर्य | 09:26 | 10:26 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 5 | शुक्र | 10:26 | 11:26 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 6 | बुध | 11:26 | 12:26 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 7 | चंद्र | 12:26 | 13:26 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 8 | शनी | 13:26 | 14:25 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 9 | गुरू | 14:25 | 15:25 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 10 | मंगळ | 15:25 | 16:25 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 11 | सूर्य | 16:25 | 17:25 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 12 | शुक्र | 17:25 | 18:25 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 13 रात्र | बुध | 18:25 | 19:25 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 14 रात्र | चंद्र | 19:25 | 20:25 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 15 रात्र | शनी | 20:25 | 21:25 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 16 रात्र | गुरू | 21:25 | 22:25 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 17 रात्र | मंगळ | 22:25 | 23:25 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
| 18 रात्र | सूर्य | 23:25 | 00:25 | अधिकार, शासकीय काम, वडिलांशी संबंधित काम संयम मागणाऱ्या कामासाठी नाही |
| 19 रात्र | शुक्र | 00:25 | 01:25 | विवाह, कला, सुखसाधनांची खरेदी, आदरातिथ्य तप किंवा कठोर घासाघीससाठी नाही |
| 20 रात्र | बुध | 01:25 | 02:26 | व्यापार, लेखन, हिशेब, अभ्यास, वाटाघाटी जे कायमस्वरूपी हवे त्यासाठी नाही |
| 21 रात्र | चंद्र | 02:26 | 03:26 | प्रवास, पाणी, आई, आणि जिथे मृदू उत्तर हवे ज्या निर्णयावर ठाम राहायचे त्यासाठी नाही |
| 22 रात्र | शनी | 03:26 | 04:26 | श्रम, दुरुस्ती, आणि जे संथ व संरचनात्मक ज्या सुरुवातीला वेग हवा त्यासाठी नाही |
| 23 रात्र | गुरू | 04:26 | 05:26 | शिक्षण, सल्ला, संस्कार, आणि जे टिकावे सर्वसाधारणपणे सर्वाधिक शुभ होरा |
| 24 रात्र | मंगळ | 05:26 | 06:26 | शस्त्रक्रिया, खेळ, जमीन, आणि निवडलेला संघर्ष वाटाघाटी किंवा पहिल्या भेटीसाठी नाही |
सण आणि व्रते
| चांद्र महिना (अमावास्येला संपणारा, अमांत) | फाल्गुन |
|---|---|
| चांद्र महिना (पौर्णिमेला संपणारा, पौर्णिमांत) | फाल्गुन |
| पक्ष (शुद्ध किंवा वद्य) | शुक्ल |
| तिथी | 15 |
| सण आणि व्रते | तारीख कशी ठरते | कुठे पाळले जाते |
|---|---|---|
| होळी / धुळवड रंग — नेहमी होलिका दहनाच्या दुसऱ्या दिवशी, म्हणून तिथी त्यावरून ठरते, सूर्योदयाच्या स्वतःच्या तिथीवरून नव्हे. पौर्णिमांत गणनेत चैत्र कृष्ण 1 |
नंतरचा दिवस — होलिका दहन | संपूर्ण भारत |
पौर्णिमा — पूर्ण चंद्र