दैनिक पंचांग
सूरत, गुजरात, भारत · शुक्रवार, 14 मार्च 2025
फाल्गुन, शुक्ल · तिथि 15
दिन का हाल, आसान शब्दों में
- तिथि
- पूर्णिमा · 12:24 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा फाल्गुनी · 08:54 (15 मार्च 2025) तक
- कुछ शुरू करने का शुभ समय
- 12:23–13:11 · अभिजित
- नया काम शुरू करने से बचें
- 11:18–12:47 · राहु काल
- त्योहार
- होली / धुलंडी
सभी समय सूरत, गुजरात, भारत के हिसाब से हैं। जगह बदलने पर समय भी बदल जाते हैं।
सूर्योदय
06:48सूर्यास्त
18:47चंद्रोदय
18:57चंद्रास्त
06:45चंद्रोदय और चंद्रास्त इस जगह के इसी कैलेंडर दिन (आधी रात से आधी रात तक) के हैं। चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देर से उगता है, इसलिए किसी-किसी दिन वह उगता या डूबता ही नहीं। जहाँ – का निशान है, उसका मतलब है कि यह एक दिन पहले या बाद में होता है।
दिन के पाँच अंग (पंचांग)
| अंग | मान | समाप्ति | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| तिथि | पूर्णिमा फिर कृष्ण प्रतिपदा |
12:24 | पूर्णा (पूर्ण) पूर्णता और परिपूर्णता की सूचक; विवाह तथा यात्रा के लिए शुभ। |
| नक्षत्र | उत्तरा फाल्गुनी | 08:54 15 मार्च 2025 |
अर्यमा अनुबंध और संरक्षण के अधिपति हैं। विश्वसनीय मित्रता, औपचारिक समझौता और दायित्व के भीतर उदारता। |
| योग | शूल फिर गण्ड |
13:23 | अशुभ नए आरंभ के लिए जिन योगों से बचने को शास्त्र कहते हैं, उनमें से एक। |
| करण | बव फिर बालव · 01:26 (15 मार्च 2025) तक फिर कौलव |
12:24 | सात चर करणों में से एक, जो मास भर दोहराते रहते हैं। |
| वार | शुक्रवार | — | शुक्र का दिन। विवाह, कला और क्रय के लिए शुभ। |
ये शुभ-अशुभ समय मुहूर्त चिंतामणि जैसे शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथों से लिए गए हैं। ये समय चुनने के पारंपरिक नियम हैं, भविष्यवाणियाँ नहीं।
किन समयों से बचें, और दोपहर का शुभ समय
- सूर्योदय 06:48
- सूर्यास्त 18:47
- परंपरा में त्याज्य
- परंपरा में शुभ
सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय (मुहूर्त)
| काल | से | तक | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 06:48 | — | |
| सूर्यास्त | 18:47 | — | |
| राहु काल | 11:18 | 12:47 | लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो वार के हिसाब से बदलता है। परंपरा कहती है कि इसमें कोई नया काम शुरू न करें। |
| गुलिक | 08:18 | 09:48 | दिन का शनि वाला हिस्सा। राहु काल वाले कारणों से ही इससे भी बचा जाता है। |
| यमगण्ड | 15:47 | 17:17 | बचने का एक और समय, यह भी वार से तय होता है। |
| अभिजित | 12:23 | 13:11 | स्थानीय दोपहर के आसपास का समय। परंपरा इसे दिन का सबसे अच्छा समय मानती है, और जब कोई दूसरा शुभ समय ख़ाली न हो, तब इसी को लिया जाता है। बुधवार को इसे नहीं लिया जाता। |
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:12 | 06:00 | भोर से पहले: परंपरा से जागने, प्रार्थना, ध्यान और अध्ययन का समय। |
| प्रातः संध्या | 05:36 | 06:48 | भोर की संध्या, सूर्योदय पर समाप्त: प्रातः पूजा का समय। |
| विजय मुहूर्त | 14:47 | 15:35 | यात्रा आरंभ करने और सफलता चाहने वाले कार्यों के लिए शुभ। |
| गोधूलि मुहूर्त | 18:47 | 19:11 | सूर्यास्त का गोधूलि बेला: कई क्षेत्रों में विवाह के लिए शुभ। |
| सायाह्न संध्या | 18:47 | 19:59 | संध्या समय की संध्या, सूर्यास्त से: सायं पूजा का समय। |
| निशीथ मुहूर्त | 00:23 | 01:11 15 मार्च 2025 |
मध्यरात्रि का मुहूर्त, अभिजित का प्रतिरूप: शिव और काली की पूजा के लिए, जैसे शिवरात्रि पर। |
| दुर्मुहूर्त | 09:12 | 10:00 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| दुर्मुहूर्त | 13:11 | 13:59 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| अमृत काल | 00:55 15 मार्च 2025 |
02:42 15 मार्च 2025 |
लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो सूर्य से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है: शुभ काम शुरू करने के लिए उत्तम माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 14:18 | 16:04 | चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
दिन की जानकारी
- दिनमान
- 11 घं 59 मि
- रात्रिमान
- 11 घं 59 मि
- मध्याह्न
- 12:47
- आज यात्रा के लिए जिस दिशा से बचें (दिशा शूल)
- पश्चिम
यहाँ सूर्योदय वह समय है, जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखाई देता है, जैसा दृक् पंचांग में होता है। जो पंचांग सूर्य के बीच के हिस्से को लेते हैं, उनमें दो से चार मिनट का फ़र्क़ हो सकता है।
चौघड़िया
रात का चौघड़िया दिन वाले से अलग जगह से शुरू होता है, इसलिए दोनों अलग-अलग दिए गए हैं।
दिन
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| चल | 06:48 | 08:18 | सम यात्रा और आवागमन |
| लाभ | 08:18 | 09:48 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 09:48 | 11:18 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| काल | 11:18 | 12:47 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| शुभ | 12:47 | 14:17 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| रोग | 14:17 | 15:47 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| उद्वेग | 15:47 | 17:17 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| चल | 17:17 | 18:47 | सम यात्रा और आवागमन |
रात
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| रोग | 18:47 | 20:17 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| काल | 20:17 | 21:47 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| लाभ | 21:47 | 23:17 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 23:17 | 00:47 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| शुभ | 00:47 | 02:17 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| अमृत | 02:17 | 03:47 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| चल | 03:47 | 05:17 | सम यात्रा और आवागमन |
| रोग | 05:17 | 06:47 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
गौरी पंचांगम्
दिन को आठ हिस्सों में बाँटने का तमिल तरीक़ा, अलग नामों के साथ। यह अपनी अलग तालिका है, अनुवाद नहीं: दोनों पद्धतियाँ हमेशा इस पर एकमत नहीं होतीं कि दिन का कौन-सा हिस्सा शुभ है।
| गौरी | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| विषम् | 06:48 | 08:18 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| लाभम् | 08:18 | 09:48 | शुभ लाभ, नया कार्य |
| धनम् | 09:48 | 11:18 | शुभ धन, क्रय, व्यापार |
| सुगम् | 11:18 | 12:47 | शुभ यात्रा, सुगमता, आतिथ्य |
| अमृतम् | 12:47 | 14:17 | सर्वोत्तम कोई भी मंगल कार्य |
| उथि | 14:17 | 15:47 | सम सामान्य कार्य |
| सोरम् | 15:47 | 17:17 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| रोगम् | 17:17 | 18:47 | वर्जित केवल औषधि |
दिन के बारे में और जानकारीदिन भर की चंद्र और सूर्य राशियाँ, संवत् (साल), ऋतुएँ, ख़ास योग और समय, चंद्रबल और ताराबल, दिन भर का लग्न, और होरा की तालिका।
दिन की और बातें
- चंद्र राशि
- सिंह · 12:56 तक
फिर कन्या - सूर्य राशि
- कुम्भ · 18:50 तक
फिर मीन - नक्षत्र पद
- उत्तरा फाल्गुनी पद 1 · 12:56 तक
उत्तरा फाल्गुनी पद 2 · 19:34 तक
उत्तरा फाल्गुनी पद 3 · 02:13 (15 मार्च 2025) तक
उत्तरा फाल्गुनी पद 4 - सूर्य नक्षत्र
- पूर्व भाद्रपद पद 3 · 18:50 तक
फिर पूर्व भाद्रपद पद 4 - आनन्दादि योग
- शुभ
- शक संवत्
- 1946 क्रोधी
- विक्रम संवत्
- 2081 पिंगल
- गुजराती संवत्
- 2081 नल
- ऋतु (चान्द्र मास से)
- शिशिर
- ऋतु (सूर्य की ऋतु से)
- वसन्त
- अयन (निरयन)
- उत्तरायण
- अयन (संक्रांति-बिंदु से)
- उत्तरायण
- चन्द्र वास (चन्द्रमा की दिशा)
- पूर्व · 12:56 तक
फिर दक्षिण - राहु वास (राहु की दिशा)
- आग्नेय
- बृहस्पति संवत्सर
- कालयुक्त · 14:42 (25 अप्रै 2025) तक
शक संवत् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, और गुजराती संवत् कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से, यानी दीवाली के अगले दिन। दो ऋतुएँ इसलिए दी गई हैं, क्योंकि एक चंद्र मास के हिसाब से चलती है और दूसरी सूर्य के हिसाब से असली मौसम के अनुसार।
| काल | से | तक | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| रवि योग | आज नहीं | जब चन्द्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 4वाँ, 6ठा, 9वाँ, 10वाँ, 13वाँ या 20वाँ हो: दिन के कई दोष दूर करने वाला माना जाता है, इसलिए कार्यारम्भ के लिए खोजा जाता है। | |
| भद्रा | आज नहीं | विष्टि करण। इसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं, विशेषकर जब भद्रा पृथ्वी पर वास करती मानी जाती है; स्वर्ग या पाताल में हो तो यहाँ हानिरहित मानी जाती है। | |
| गण्ड मूल | आज नहीं | चन्द्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में, जल और अग्नि राशियों के संधि-नक्षत्र। इसमें जन्म होने पर परम्परा से शान्ति कराई जाती है। | |
| पंचक | आज नहीं | चन्द्रमा कुम्भ या मीन में, धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अन्त तक। परम्परा से दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और लकड़ी इकट्ठा करना टाला जाता है। | |
| बाण: अग्नि | 06:48 | 18:50 | राशि में सूर्य के अंश से तय होता है, इसलिए हर बाण लगभग एक दिन रहता है। मुहूर्त ग्रंथ औषधि के लिए रोग, निर्माण के लिए अग्नि, शासन से व्यवहार के लिए राज, यात्रा के लिए चोर और विवाह के लिए मृत्यु बाण टालते हैं। |
चन्द्रबल और ताराबल
इनसे आप दिन को अपनी ख़ुद की राशि (चंद्र राशि) और जन्म नक्षत्र से मिलाकर देख सकते हैं। अगर आपकी राशि या नक्षत्र सूची में है, तो दिन आपके लिए अनुकूल है। चंद्रबल में आज के चंद्रमा की राशि आपकी राशि से गिनी जाती है (1ली, 3री, 6ठी, 7वीं, 10वीं और 11वीं शुभ हैं); ताराबल में आज के चंद्रमा का नक्षत्र आपके नक्षत्र से नौ-नौ के समूहों में गिना जाता है।
- चन्द्रबल · 12:56 तक
- मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन
अष्टम चन्द्र: मकर - चन्द्रबल · अगले सूर्योदय तक
- मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
अष्टम चन्द्र: कुम्भ - ताराबल
- भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, रेवती
उदय लग्न
| लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| कुम्भ | 05:18 | 06:53 |
| मीन | 06:53 | 08:25 |
| मेष | 08:25 | 10:07 |
| वृषभ | 10:07 | 12:06 |
| मिथुन | 12:06 | 14:19 |
| कर्क | 14:19 | 16:34 |
| सिंह | 16:34 | 18:44 |
| कन्या | 18:44 | 20:53 |
| तुला | 20:53 | 23:06 |
| वृश्चिक | 23:06 | 01:21 15 मार्च 2025 |
| धनु | 01:21 15 मार्च 2025 | 03:26 15 मार्च 2025 |
| मकर | 03:26 15 मार्च 2025 | 05:14 15 मार्च 2025 |
पंचक रहित मुहूर्त
| काल | से | तक |
|---|---|---|
| रोग | 06:48 | 06:53 |
| पंचक रहित (शुभ) | 06:53 | 10:07 |
| रोग | 10:07 | 12:06 |
| पंचक रहित (शुभ) | 12:06 | 12:24 |
| मृत्यु | 12:24 | 14:19 |
| अग्नि | 14:19 | 16:34 |
| पंचक रहित (शुभ) | 16:34 | 18:44 |
| राज | 18:44 | 20:53 |
| पंचक रहित (शुभ) | 20:53 | 23:06 |
| चोर | 23:06 | 01:21 15 मार्च 2025 |
| पंचक रहित (शुभ) | 01:21 15 मार्च 2025 | 03:26 15 मार्च 2025 |
| रोग | 03:26 15 मार्च 2025 | 05:14 15 मार्च 2025 |
| पंचक रहित (शुभ) | 05:14 15 मार्च 2025 | 06:47 15 मार्च 2025 |
पूर्व में उदय हो रही राशि (लग्न) दिन भर बदलती रहती है, सूर्योदय के समय उदय हो रही राशि से शुरू होकर। पंचक रहित मुहूर्त दिन को वहाँ-वहाँ बाँटता है, जहाँ लग्न, तिथि या नक्षत्र बदलता है, और हर हिस्से पर बताता है कि वह पंचक से मुक्त (शुभ) है या नहीं।
होरा (ग्रहों के घंटे)
सूर्योदय से शुरू करके दिन और रात, दोनों को बारह-बारह होरा में बाँटा जाता है, और हर होरा का स्वामी एक ग्रह होता है। दिन की होरा दिन के उजाले को आपस में बाँटती हैं और रात की होरा अँधेरे को, इसलिए गर्मियों में दिन की एक होरा एक घंटे से लंबी होती है। हर दिन की पहली होरा उस दिन के ग्रह की होती है, और वारों के नाम यहीं से आए हैं।
| # | होरा स्वामी | से | तक | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | शुक्र | 06:48 | 07:48 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 2 | बुध | 07:48 | 08:48 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 3 | चंद्र | 08:48 | 09:48 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 4 | शनि | 09:48 | 10:48 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 5 | गुरु | 10:48 | 11:48 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 6 | मंगल | 11:48 | 12:47 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 7 | सूर्य | 12:47 | 13:47 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 8 | शुक्र | 13:47 | 14:47 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 9 | बुध | 14:47 | 15:47 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 10 | चंद्र | 15:47 | 16:47 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 11 | शनि | 16:47 | 17:47 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 12 | गुरु | 17:47 | 18:47 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 13 रात्रि | मंगल | 18:47 | 19:47 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 14 रात्रि | सूर्य | 19:47 | 20:47 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 15 रात्रि | शुक्र | 20:47 | 21:47 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 16 रात्रि | बुध | 21:47 | 22:47 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 17 रात्रि | चंद्र | 22:47 | 23:47 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 18 रात्रि | शनि | 23:47 | 00:47 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 19 रात्रि | गुरु | 00:47 | 01:47 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 20 रात्रि | मंगल | 01:47 | 02:47 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 21 रात्रि | सूर्य | 02:47 | 03:47 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 22 रात्रि | शुक्र | 03:47 | 04:47 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 23 रात्रि | बुध | 04:47 | 05:47 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 24 रात्रि | चंद्र | 05:47 | 06:47 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
त्योहार और व्रत
| चंद्र मास (अमावस्या पर ख़त्म होने वाला, अमांत) | फाल्गुन |
|---|---|
| चंद्र मास (पूर्णिमा पर ख़त्म होने वाला, पूर्णिमांत) | फाल्गुन |
| पक्ष (शुक्ल या कृष्ण, यानी उजाला या अँधेरा पखवाड़ा) | शुक्ल |
| तिथि | 15 |
| त्योहार और व्रत | तारीख़ कैसे तय होती है | कहाँ मनाया जाता है |
|---|---|---|
| होली / धुलंडी रंग — सदैव होलिका दहन के अगले दिन, इसीलिए तिथि उसी से तय होती है, सूर्योदय की अपनी तिथि से नहीं। पूर्णिमांत गणना में चैत्र कृष्ण 1 |
होलिका दहन के अगले दिन | सम्पूर्ण भारत |
पूर्णिमा — पूर्ण चंद्रमा