दैनिक पंचांग
वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत · गुरुवार, 24 अग 2028
भाद्रपद, शुक्ल · तिथि 5
दिन का हाल, आसान शब्दों में
- तिथि
- पंचमी · 23:09 तक
- नक्षत्र
- चित्रा · 21:14 तक
- कुछ शुरू करने का शुभ समय
- 11:34–12:25 · अभिजित
- नया काम शुरू करने से बचें
- 13:36–15:12 · राहु काल
- त्योहार
- ऋषि पंचमी
सभी समय वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत के हिसाब से हैं। जगह बदलने पर समय भी बदल जाते हैं।
सूर्योदय
05:35सूर्यास्त
18:24चंद्रोदय
09:34चंद्रास्त
20:58चंद्रोदय और चंद्रास्त इस जगह के इसी कैलेंडर दिन (आधी रात से आधी रात तक) के हैं। चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट देर से उगता है, इसलिए किसी-किसी दिन वह उगता या डूबता ही नहीं। जहाँ – का निशान है, उसका मतलब है कि यह एक दिन पहले या बाद में होता है।
दिन के पाँच अंग (पंचांग)
| अंग | मान | समाप्ति | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| तिथि | पंचमी फिर षष्ठी |
23:09 | पूर्णा (पूर्ण) पूर्णता और परिपूर्णता की सूचक; विवाह तथा यात्रा के लिए शुभ। |
| नक्षत्र | चित्रा फिर स्वाति |
21:14 | त्वष्टा दैवी शिल्पी हैं। रचना, तेजस्विता और सुगठित सुंदर वस्तुओं का निर्माण। |
| योग | शुभ फिर शुक्ल |
09:13 | शुभ मुहूर्त-साहित्य में शुभ योगों में गिना जाता है। |
| करण | बव फिर बालव · 23:09 तक फिर कौलव |
12:28 | सात चर करणों में से एक, जो मास भर दोहराते रहते हैं। |
| वार | गुरुवार | — | गुरु का दिन। आरंभ के लिए परंपरागत रूप से सर्वाधिक शुभ। |
ये शुभ-अशुभ समय मुहूर्त चिंतामणि जैसे शास्त्रीय मुहूर्त ग्रंथों से लिए गए हैं। ये समय चुनने के पारंपरिक नियम हैं, भविष्यवाणियाँ नहीं।
किन समयों से बचें, और दोपहर का शुभ समय
- सूर्योदय 05:35
- सूर्यास्त 18:24
- परंपरा में त्याज्य
- परंपरा में शुभ
सूर्योदय, सूर्यास्त और शुभ-अशुभ समय (मुहूर्त)
| काल | से | तक | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| सूर्योदय | 05:35 | — | |
| सूर्यास्त | 18:24 | — | |
| राहु काल | 13:36 | 15:12 | लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो वार के हिसाब से बदलता है। परंपरा कहती है कि इसमें कोई नया काम शुरू न करें। |
| गुलिक | 08:47 | 10:23 | दिन का शनि वाला हिस्सा। राहु काल वाले कारणों से ही इससे भी बचा जाता है। |
| यमगण्ड | 05:35 | 07:11 | बचने का एक और समय, यह भी वार से तय होता है। |
| अभिजित | 11:34 | 12:25 | स्थानीय दोपहर के आसपास का समय। परंपरा इसे दिन का सबसे अच्छा समय मानती है, और जब कोई दूसरा शुभ समय ख़ाली न हो, तब इसी को लिया जाता है। बुधवार को इसे नहीं लिया जाता। |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:06 | 04:50 | भोर से पहले: परंपरा से जागने, प्रार्थना, ध्यान और अध्ययन का समय। |
| प्रातः संध्या | 04:28 | 05:35 | भोर की संध्या, सूर्योदय पर समाप्त: प्रातः पूजा का समय। |
| विजय मुहूर्त | 14:08 | 14:59 | यात्रा आरंभ करने और सफलता चाहने वाले कार्यों के लिए शुभ। |
| गोधूलि मुहूर्त | 18:24 | 18:47 | सूर्यास्त का गोधूलि बेला: कई क्षेत्रों में विवाह के लिए शुभ। |
| सायाह्न संध्या | 18:24 | 19:31 | संध्या समय की संध्या, सूर्यास्त से: सायं पूजा का समय। |
| निशीथ मुहूर्त | 23:37 | 00:22 25 अग 2028 |
मध्यरात्रि का मुहूर्त, अभिजित का प्रतिरूप: शिव और काली की पूजा के लिए, जैसे शिवरात्रि पर। |
| दुर्मुहूर्त | 09:51 | 10:43 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| दुर्मुहूर्त | 14:59 | 15:50 | शुभ कार्यों के आरंभ के लिए वर्जित। |
| अमृत काल | 15:23 | 16:51 | लगभग डेढ़ घंटे का समय, जो सूर्य से नहीं, चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है: शुभ काम शुरू करने के लिए उत्तम माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 06:35 | 08:03 | चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
| वर्ज्यम् | 02:31 25 अग 2028 |
04:01 25 अग 2028 |
चंद्रमा के नक्षत्र से तय लगभग डेढ़ घंटे का समय, जिसे त्याज्यम् भी कहते हैं: इसमें नए काम शुरू नहीं किए जाते। दक्षिण भारत में राहु काल के साथ विशेष रूप से माना जाता है। |
दिन की जानकारी
- दिनमान
- 12 घं 49 मि
- रात्रिमान
- 11 घं 11 मि
- मध्याह्न
- 12:00
- आज यात्रा के लिए जिस दिशा से बचें (दिशा शूल)
- दक्षिण
यहाँ सूर्योदय वह समय है, जब सूर्य का ऊपरी किनारा दिखाई देता है, जैसा दृक् पंचांग में होता है। जो पंचांग सूर्य के बीच के हिस्से को लेते हैं, उनमें दो से चार मिनट का फ़र्क़ हो सकता है।
चौघड़िया
रात का चौघड़िया दिन वाले से अलग जगह से शुरू होता है, इसलिए दोनों अलग-अलग दिए गए हैं।
दिन
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| शुभ | 05:35 | 07:11 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| रोग | 07:11 | 08:47 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| उद्वेग | 08:47 | 10:23 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| चल | 10:23 | 12:00 | सम यात्रा और आवागमन |
| लाभ | 12:00 | 13:36 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| अमृत | 13:36 | 15:12 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| काल | 15:12 | 16:48 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| शुभ | 16:48 | 18:24 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
रात
| चौघड़िया | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृत | 18:24 | 19:48 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
| चल | 19:48 | 21:12 | सम यात्रा और आवागमन |
| रोग | 21:12 | 22:36 | वर्जित केवल विवाद और ऋण-वसूली |
| काल | 22:36 | 00:00 | वर्जित कुछ मतों में केवल धन-संचय |
| लाभ | 00:00 | 01:24 | शुभ व्यापार, नया व्यवसाय, लाभ |
| उद्वेग | 01:24 | 02:48 | वर्जित केवल राजकीय कार्य |
| शुभ | 02:48 | 04:11 | शुभ संस्कार, विवाह, कोई भी मंगल कार्य |
| अमृत | 04:11 | 05:35 | सर्वोत्तम कोई भी कार्य |
गौरी पंचांगम्
दिन को आठ हिस्सों में बाँटने का तमिल तरीक़ा, अलग नामों के साथ। यह अपनी अलग तालिका है, अनुवाद नहीं: दोनों पद्धतियाँ हमेशा इस पर एकमत नहीं होतीं कि दिन का कौन-सा हिस्सा शुभ है।
| गौरी | से | तक | गुण |
|---|---|---|---|
| अमृतम् | 05:35 | 07:11 | सर्वोत्तम कोई भी मंगल कार्य |
| उथि | 07:11 | 08:47 | सम सामान्य कार्य |
| सोरम् | 08:47 | 10:23 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| रोगम् | 10:23 | 12:00 | वर्जित केवल औषधि |
| विषम् | 12:00 | 13:36 | वर्जित कोई नया कार्य नहीं |
| लाभम् | 13:36 | 15:12 | शुभ लाभ, नया कार्य |
| धनम् | 15:12 | 16:48 | शुभ धन, क्रय, व्यापार |
| सुगम् | 16:48 | 18:24 | शुभ यात्रा, सुगमता, आतिथ्य |
दिन के बारे में और जानकारीदिन भर की चंद्र और सूर्य राशियाँ, संवत् (साल), ऋतुएँ, ख़ास योग और समय, चंद्रबल और ताराबल, दिन भर का लग्न, और होरा की तालिका।
दिन की और बातें
- चंद्र राशि
- कन्या · 10:11 तक
फिर तुला - सूर्य राशि
- सिंह
- नक्षत्र पद
- चित्रा पद 2 · 10:11 तक
चित्रा पद 3 · 15:42 तक
चित्रा पद 4 · 21:14 तक
स्वाति पद 1 · 02:49 (25 अग 2028) तक
स्वाति पद 2 - सूर्य नक्षत्र
- मघा पद 3
- आनन्दादि योग
- चर · 21:14 तक
फिर स्थिर - शक संवत्
- 1950 कीलक
- विक्रम संवत्
- 2085 दुर्मति
- गुजराती संवत्
- 2084 सिद्धार्थी
- ऋतु (चान्द्र मास से)
- वर्षा
- ऋतु (सूर्य की ऋतु से)
- शरद्
- अयन (निरयन)
- दक्षिणायन
- अयन (संक्रांति-बिंदु से)
- दक्षिणायन
- चन्द्र वास (चन्द्रमा की दिशा)
- दक्षिण · 10:11 तक
फिर पश्चिम - राहु वास (राहु की दिशा)
- दक्षिण
- बृहस्पति संवत्सर
- दुन्दुभि · 17:49 (08 अप्रै 2029) तक
शक संवत् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है, और गुजराती संवत् कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से, यानी दीवाली के अगले दिन। दो ऋतुएँ इसलिए दी गई हैं, क्योंकि एक चंद्र मास के हिसाब से चलती है और दूसरी सूर्य के हिसाब से असली मौसम के अनुसार।
| काल | से | तक | पुराने ग्रंथ क्या कहते हैं |
|---|---|---|---|
| रवि योग | 21:14 | 05:35 25 अग 2028 |
जब चन्द्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 4वाँ, 6ठा, 9वाँ, 10वाँ, 13वाँ या 20वाँ हो: दिन के कई दोष दूर करने वाला माना जाता है, इसलिए कार्यारम्भ के लिए खोजा जाता है। |
| भद्रा | आज नहीं | विष्टि करण। इसमें शुभ कार्य टाले जाते हैं, विशेषकर जब भद्रा पृथ्वी पर वास करती मानी जाती है; स्वर्ग या पाताल में हो तो यहाँ हानिरहित मानी जाती है। | |
| गण्ड मूल | आज नहीं | चन्द्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में, जल और अग्नि राशियों के संधि-नक्षत्र। इसमें जन्म होने पर परम्परा से शान्ति कराई जाती है। | |
| पंचक | आज नहीं | चन्द्रमा कुम्भ या मीन में, धनिष्ठा के उत्तरार्ध से रेवती के अन्त तक। परम्परा से दक्षिण दिशा की यात्रा, छत डालना और लकड़ी इकट्ठा करना टाला जाता है। | |
| बाण: रोग | 03:48 25 अग 2028 | 05:35 25 अग 2028 |
राशि में सूर्य के अंश से तय होता है, इसलिए हर बाण लगभग एक दिन रहता है। मुहूर्त ग्रंथ औषधि के लिए रोग, निर्माण के लिए अग्नि, शासन से व्यवहार के लिए राज, यात्रा के लिए चोर और विवाह के लिए मृत्यु बाण टालते हैं। |
चन्द्रबल और ताराबल
इनसे आप दिन को अपनी ख़ुद की राशि (चंद्र राशि) और जन्म नक्षत्र से मिलाकर देख सकते हैं। अगर आपकी राशि या नक्षत्र सूची में है, तो दिन आपके लिए अनुकूल है। चंद्रबल में आज के चंद्रमा की राशि आपकी राशि से गिनी जाती है (1ली, 3री, 6ठी, 7वीं, 10वीं और 11वीं शुभ हैं); ताराबल में आज के चंद्रमा का नक्षत्र आपके नक्षत्र से नौ-नौ के समूहों में गिना जाता है।
- चन्द्रबल · 10:11 तक
- मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन
अष्टम चन्द्र: कुम्भ - चन्द्रबल · अगले सूर्योदय तक
- मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
अष्टम चन्द्र: मीन - ताराबल · 21:14 तक
- भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, रेवती
- ताराबल · अगले सूर्योदय तक
- अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद
उदय लग्न
| लग्न | से | तक |
|---|---|---|
| सिंह | 05:07 | 07:21 |
| कन्या | 07:21 | 09:33 |
| तुला | 09:33 | 11:50 |
| वृश्चिक | 11:50 | 14:07 |
| धनु | 14:07 | 16:12 |
| मकर | 16:12 | 17:56 |
| कुम्भ | 17:56 | 19:27 |
| मीन | 19:27 | 20:56 |
| मेष | 20:56 | 22:34 |
| वृषभ | 22:34 | 00:31 25 अग 2028 |
| मिथुन | 00:31 25 अग 2028 | 02:45 25 अग 2028 |
| कर्क | 02:45 25 अग 2028 | 05:03 25 अग 2028 |
पंचक रहित मुहूर्त
| काल | से | तक |
|---|---|---|
| अग्नि | 05:35 | 07:21 |
| पंचक रहित (शुभ) | 07:21 | 09:33 |
| राज | 09:33 | 11:50 |
| पंचक रहित (शुभ) | 11:50 | 14:07 |
| चोर | 14:07 | 16:12 |
| पंचक रहित (शुभ) | 16:12 | 17:56 |
| रोग | 17:56 | 19:27 |
| पंचक रहित (शुभ) | 19:27 | 21:14 |
| रोग | 21:14 | 22:34 |
| पंचक रहित (शुभ) | 22:34 | 23:09 |
| मृत्यु | 23:09 | 00:31 25 अग 2028 |
| अग्नि | 00:31 25 अग 2028 | 02:45 25 अग 2028 |
| पंचक रहित (शुभ) | 02:45 25 अग 2028 | 05:03 25 अग 2028 |
| राज | 05:03 25 अग 2028 | 05:35 25 अग 2028 |
पूर्व में उदय हो रही राशि (लग्न) दिन भर बदलती रहती है, सूर्योदय के समय उदय हो रही राशि से शुरू होकर। पंचक रहित मुहूर्त दिन को वहाँ-वहाँ बाँटता है, जहाँ लग्न, तिथि या नक्षत्र बदलता है, और हर हिस्से पर बताता है कि वह पंचक से मुक्त (शुभ) है या नहीं।
होरा (ग्रहों के घंटे)
सूर्योदय से शुरू करके दिन और रात, दोनों को बारह-बारह होरा में बाँटा जाता है, और हर होरा का स्वामी एक ग्रह होता है। दिन की होरा दिन के उजाले को आपस में बाँटती हैं और रात की होरा अँधेरे को, इसलिए गर्मियों में दिन की एक होरा एक घंटे से लंबी होती है। हर दिन की पहली होरा उस दिन के ग्रह की होती है, और वारों के नाम यहीं से आए हैं।
| # | होरा स्वामी | से | तक | किसके लिए |
|---|---|---|---|---|
| 1 | गुरु | 05:35 | 06:39 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 2 | मंगल | 06:39 | 07:43 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 3 | सूर्य | 07:43 | 08:47 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 4 | शुक्र | 08:47 | 09:51 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 5 | बुध | 09:51 | 10:55 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 6 | चंद्र | 10:55 | 12:00 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 7 | शनि | 12:00 | 13:04 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 8 | गुरु | 13:04 | 14:08 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 9 | मंगल | 14:08 | 15:12 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 10 | सूर्य | 15:12 | 16:16 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 11 | शुक्र | 16:16 | 17:20 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 12 | बुध | 17:20 | 18:24 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 13 रात्रि | चंद्र | 18:24 | 19:20 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 14 रात्रि | शनि | 19:20 | 20:16 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 15 रात्रि | गुरु | 20:16 | 21:12 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 16 रात्रि | मंगल | 21:12 | 22:08 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 17 रात्रि | सूर्य | 22:08 | 23:04 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
| 18 रात्रि | शुक्र | 23:04 | 00:00 | विवाह, कला, सुख-सामग्री की खरीद, आतिथ्य तप या कठोर मोल-भाव के लिए नहीं |
| 19 रात्रि | बुध | 00:00 | 00:56 | व्यापार, लेखन, लेखा, अध्ययन, वार्ता जो स्थायी रहना चाहिए उसके लिए नहीं |
| 20 रात्रि | चंद्र | 00:56 | 01:52 | यात्रा, जल, माता, और जिसमें कोमल उत्तर चाहिए जिस निर्णय पर अडिग रहना हो उसके लिए नहीं |
| 21 रात्रि | शनि | 01:52 | 02:48 | श्रम, मरम्मत, और जो धीमा तथा संरचनात्मक हो जिस आरंभ को शीघ्र गति चाहिए उसके लिए नहीं |
| 22 रात्रि | गुरु | 02:48 | 03:44 | शिक्षण, परामर्श, संस्कार, और जो टिकाऊ हो सामान्यतः सबसे शुभ होरा |
| 23 रात्रि | मंगल | 03:44 | 04:39 | शल्यक्रिया, खेल, भूमि, और चुनी हुई भिड़ंत मोल-भाव या पहली भेंट के लिए नहीं |
| 24 रात्रि | सूर्य | 04:39 | 05:35 | अधिकार, राजकीय कार्य, पिता से संबंधित काम धैर्य माँगने वाले काम के लिए नहीं |
त्योहार और व्रत
| चंद्र मास (अमावस्या पर ख़त्म होने वाला, अमांत) | भाद्रपद |
|---|---|
| चंद्र मास (पूर्णिमा पर ख़त्म होने वाला, पूर्णिमांत) | भाद्रपद |
| पक्ष (शुक्ल या कृष्ण, यानी उजाला या अँधेरा पखवाड़ा) | शुक्ल |
| तिथि | 5 |
| त्योहार और व्रत | तारीख़ कैसे तय होती है | कहाँ मनाया जाता है |
|---|---|---|
| ऋषि पंचमी सप्तऋषियों का सम्मान, मध्याह्न में मनाया जाता है |
मध्याह्न | सम्पूर्ण भारत |